फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Panipat News: रेड जोन शहर, आंखों में जलन और घुट रहा दम

विज्ञापन
विज्ञापन
दिवाली के बाद तक प्रदूषण से राहत के आसार नहीं
विज्ञापन

सोमवार को पानीपत का एयर क्वालिटी इंडेक्स 346 दर्ज किया गया
इस साल के अपने उच्चतम स्तर पर दर्ज किया गया एक्यूआई
-दिल्ली में डीजल के वाहनों के प्रवेश पर रोक
-पानीपत से हर रोज दो सौ वाहन दिल्ली जाते हैं
फोटो- 17
माई सिटी रिपोर्टर

पानीपत। शहर में पर्यावरण प्रदूषण लगातार बिगड़ता जा रहा है। पिछले चार दिन से एयर क्वालिटी इंडेक्स रेड जोन में है। ऐसे में शहरवासियों की सांसें फूल गई हैं। स्मॉग से जहां आंखों में जलन और सांस लेने में कठिनाई होने लगी है। यह बच्चों व बुजुर्गों के लिए घातक साबित हो रहा है।
सोमवार को शहर का एक्यूआई इस साल के सबसे उच्चतम स्तर 346 पर पहुंच गया है। विशेषज्ञों के अनुसार दिवाली और उसके बाद भी प्रदूषण से राहत की उम्मीद नहीं है। स्मॉग के चलते रात और अल सुबह की दृश्यता भी घट गई है। इन सबके बीच दिल्ली में डीजल वाहनों की पाबंदी पर बड़ी परेशानी खड़ी हो गई है। मिक्सर प्लांट में धुआं निकलते देखा जा सकता है। इसके अलावा पराली जलाने के मामले में भी सामने आ रहे हैं। जबकि कृषि विभाग और प्रशासन के रिकॉर्ड में 20 की मामले हैं। एनजीटी ने पर्यावरण प्रदूषण का रिकॉर्ड मांगा है।
विज्ञापन

एक्यूआई 400 से अधिक पहुंचा तो बंद हो सकते हैं स्कूल

शहर का एक्यूआई अगर 400 से ऊपर पहुंचा तो कड़े पाबंदियां लागू हो सकती हैं। स्कूलों को बंद किया जा सकता है। उद्योगों के संचालन पर रात को रोक लगाई जा सकती है। इससे टेक्सटाइल नगरी को करोड़ों का नुकसान होगा। फिलहाल प्रशासन स्कूलों की छुट्टी नहीं कर रहा है। प्रशासन इसको लेकर अन्य कदम उठा रहा है।
डीजल के वाहनों की पाबंदी
दिल्ली में डीजल के वाहनों पर पाबंदी लगा दी है। जिले से करीब 200 ट्रक व दूसरे वाहन दिल्ली जाते हैं। अधिकतर वाहन दिल्ली आजादपुर सब्जी मंडी और सदर बाजार में किरयाने का सामान लेने जाते हैं। इसके अलावा काफी संंख्या में डीजल वाहन रिफाइनरी से जरूरी सामान लेकर जाते हैं। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष धर्मबीर मलिक ने बताया कि इस तरह से वाहनों पर पाबंदी लगाकर सरकारें अपनी कमियों को छुपा रही हैं। इससे आमजन पर काफी बुरा प्रभाव पड़ेगा।

पराली जलाने से भी बिगड़ रही हवा
पराली जलाने से भी पर्यावरण प्रदूषण खराब हो रहा है। हालांकि कृषि विभाग के रिकॉर्ड में 20 मामले सामने आए हैं। समालखा क्षेत्र कुछ किसानों का कहना है कि फसल अवशेष प्रबंधन की मशीन काफी महंगी है। मध्यम वर्गीय किसान इन सबको नहीं खरीद सकता है। ऐसे में उनके सामने फसल अवशेष जलाने के सिवाय कोई विकल्प नहीं है।

पिछले पांच दिन का एक्यूआई


दिन एक्यूआई

दो नवंबर 295

तीन नवंबर 301

चार नवंबर 306

पांच नवंबर 340

छह नवंबर 346


आने वाले दिनों में और खराब हो सकती है शहर की हवा : डॉ. राजेंद्र

हवा का दबाव बढ़ रहा है। तापमान में गिरावट आ रही है। स्मॉग की चादर बनने का ये बड़ा कारण है। बरसात में स्मॉग की परत टूटेगी। आने वाले दिनों में एक्यूआई और अधिक बढ़ेगा। दिवाली के बाद एक्यूआई में बढ़ोतरी होगी तो सांस लेने व आंखों में दिक्कत होगी। प्रशासन को एक्यूआई कंट्रोल करने के लिए कड़े कदम उठाने होंगे।
विज्ञापन


डॉ. राजेंद्र सिंह, विशेषज्ञ पर्यावरण संबंधी मामले।


वर्जन :

प्रदूषण नियंत्रण करने के लिए विभिन्न विभागों की जिम्मेदारी है। नगर निगम को पेड़ पौधों व सड़कों पर पानी का छिड़काव करना है। इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए गए हैं। संबंधित विभागों को नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

डॉ. वीरेंद्र कुमार दहिया, उपायुक्त।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें