पानीपत। राजपूत कॉलोनी की रीतिका की प्रसव के दौरान हुई मौत मामले की जांच जारी है। अब सिविल सर्जन व डिप्टी सिविल सर्जन जल्द इस संबंध में डॉक्टरों की बैठक बुलाकर पूरी घटना की जानकारी लेंगे। रीतिका की मौत के कारणों की समीक्षा की जाएगी। जांच में जिस डॉक्टर व स्टाफ की लापरवाही पाई जाएगी, उस पर कार्रवाई की जाएगी। सिविल अस्पताल में पिछले एक साल में प्रसव के दौरान यह चौथी मौत की घटना है। सिविल सर्जन के नेतृत्व में गठित कमेटी सिविल अस्पताल में प्रसव के दौरान या अन्य कारणों से होने वाली नवजातों की मौत की समीक्षा करती है। इसका उद्देश्य शिशु व मातृत्व मृत्यु दर में कमी लाना है।
राजपूत कॉलोनी निवासी रीतिका (32) पत्नी राजेश तीन बच्चों की मां थी। रीतिका नौ माह की गर्भवती थी। परिजन उसे शुक्रवार शाम चार बजे एंबुलेंस से सिविल अस्पताल लेकर आए थे। यहां डॉक्टर ने जांच के बाद बच्चे के पेट में कई दिन से मृत होने की जानकारी दी। परिजनों का कहना है कि उन्होंने रीतिका की हालत देखकर डॉक्टरों से जल्द सर्जरी कर मृत बच्चे को निकालने को कहा था। डॉक्टर ने उनकी बात पर गौर नहीं किया। रीतिका दर्द से कराह रही थी। स्टाफ ने उसे बेड तक नहीं दिया। रीतिका फर्श पर तड़प रही थी। शुक्रवार रात करीब साढ़े आठ बजे रीतिका को अत्यधिक रक्तस्राव शुरू हो गया। वह बार-बार स्टाफ नर्सों के आगे हाथ जोड़ते रहे। उन्होंने हर बार प्रसूति वार्ड से निकाल दिया। इसके बाद रीतिका बेसुध हो गई थी। उसे तब अंदर ले जाया गया। उन्हें कुछ देर बाद बताया गया कि उसकी मौत हो गई है। परिजनों ने अस्पताल में हंगामा कर रीतिका की मौत का जिम्मेदार डॉक्टरों व स्टाफ को बताया था। इस संबंध में पुलिस को भी शिकायत दी गई है।
रीतिका मौत मामले की जांच की जा रही है। जांच में जो भी दोषी होगा, उस पर कार्रवाई की जाएगी। कमेटी बैठक कर इस मामले की समीक्षा भी करेगी।
- डॉ. अमित पोरिया, डिप्टी एमएस सिविल अस्पताल