पानीपत। रक्षाबंधन पर रोडवेज बसों में सफर तो मुफ्त रहा, लेकिन अव्यवस्थाओं ने बहनों के पसीने छुड़ा दिए। न तो समय पर बसें मिलीं ना ही सीटें। तमाम बहनों को खड़े होकर यात्रा करनी पड़ी। कई किलोमीटर पैदल भी चलना पड़ा। गोहाना, रोहतक, कैथल रूट की बसों के लिए यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ा। पुराने अड्डे पर जेबकतरों के समूह ने चोरी की भी कोशिश की, जिसे स्टैंड इंचार्ज ने पकड़ लिया।
दोपहर एक बजे पुराने बस अड्डे पर सामान्य दिनों के मुकाबले दोगुनी भीड़ रही। आउट गेट पर महिलाएं बैग, सामान व बच्चों के साथ बस के इंतजार में खड़ी दिखीं। समालखा, सोनीपत, दिल्ली, रोहतक, हिसार, सिरसा जाने वाली महिलाएं अपने रूट की बसें आती देख सीट पाने के लिए फुर्ती से आगे बढ़कर बस में चढ़ती दिखीं। दूसरी ओर सिटी थाने के सामने ओवरब्रिज के नीचे भी महिला यात्रियों को बच्चों के साथ खड़े रहकर बस के आने का इंतजार करना पड़ा। सफर जल्दी तय करने के लिए महिलाओं ने सीट न मिलने के बावजूद बस में खड़े होकर सफर तय करना उचित समझा।
मंगलवार सुबह करीब आठ बजे बरेली जाने वाली बस में छह जेबकतरों का गिरोह चढ़ गया। बस में अलग-अलग जगह बैठकर सवारियों के बैग खंगालने लगे। एक जेबकतरा कुछ देर बाद बैग लेकर नीचे उतरा तो स्टैंड इंचार्ज संदीप को शक हो गया। उन्होंने उसे रोका तो उसके साथी बस से उतरकर भागने लगे। परिचालक की मदद से एक अन्य जेबकतरे को भी पकड़ा गया। यात्री ने बैग देखकर हंगामा किया तो यात्रियों ने दोनों जेबकतरों की धुनाई कर दी। हालांकि यात्री ने पुलिस को शिकायत देने से इंकार कर दिया।
समालखा की गीता अपने पति बिजेंद्र और बेटे के साथ रोहतक जाने के लिए सिवाह में नए बस स्टैंड पर पहुंचीं। रूट बोर्ड न होने के कारण आधे घंटे बाद बस मिली। परिचालक से तीन बार रोहतक जाने वाली बस के बारे में पूछा। परिचालक ने मुरथल वाली बस में चढ़ाकर 40 रुपये की टिकट भी दे दी। गन्नौर में गलत बस में चढ़ने का पता लगा तो परिवार बस से उतर गया। 100 रुपये का ऑटो करके वापस पानीपत पुराने अड्डे पर पहुंचे। पुराने बस अड्डे पर भी लगभग आधा घंटा इंतजार के बाद रोडवेज बस मिली।
डेराबस्सी की रीना ने बताया कि पानीपत में उनका मायका है। पानीपत आने के लिए डेराबस्सी से बस में सवार हुई थी। करनाल तक बस में खड़े होकर 100 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ा। इससे पैरों में भी दर्द हो गया। करनाल में सीट मिली तो थोड़ी राहत मिली।
सीमा ने बताया कि पानीपत से कैथल भाई को राखी बांधने जाना था। दोनों बच्चों को साथ लेकर दोपहर चार बजे सिवाह गांव में बने नए बस स्टैंड पर पहुंच गई। उम्मीद थी कि जल्द बस मिल जाएगी, लेकिन कैथल की बस मिलने में सवा दो घंटे लग गए। बस में चढ़ते समय भी काफी धक्कामुक्की हुई।
बीरमति ने बताया कि पानीपत से गोहाना जाने के लिए नए बस स्टैंड आई थी। यहां रूट बोर्ड न होने के कारण भागदौड़ कर गोहाना की बस ढूंढती रही। सवा छह बजे तक गोहाना जाने वाली कोई बस नहीं मिली। अधिकारियों को यहां रूट बोर्ड तो लगवाने चाहिए थे, ताकि यात्रियों को परेशानी ना हो।
दोपहर 12 बजे के बाद रोडवेज बसों में महिलाओं को हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली तक मुफ्त यात्रा कराई गई। सवारियां बस में चढ़ने के लिए थोड़ी जल्दबाजी करती हैं। चालकों को सवारियां चढ़ने तक बस नहीं चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
- कुलदीप जांगड़ा, महाप्रबंधक रोडवेज डिपो, पानीपत