पानीपत। नगर निगम की संपत्तिकर शाखा का काम अब अतिरिक्त आयुक्त नरेंद्र पाल मलिक, संयुक्त आयुक्त मनी त्यागी के साथ क्षेत्रीय कराधान अधिकारी कुलदीप राणा ने संभाल लिया है। बावजूद निगम के कुछ कर्मचारी लोगों को जानबूझकर परेशान करने में जुटे हैं। इन कर्मचारियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि ये पोर्टल पर दर्ज आपत्तियों में गलतियों को छोड़कर इसे स्वीकृति दे देते हैं। जिससे सामने वाले के पास संदेश जाता है कि उसका काम हो चुका है लेकिन जब संपत्तिकर की जानकारी निकलवाई जाती है तो उसमें त्रुटियां वैसे ही मिलती हैं जिनके लिए आवेदक ने आपत्ति दर्ज कराई थी।
वार्ड-16 विकास नगर निवासी अनीता देवी ने अपने मकान की जानकारी दुरुस्त करवाने, विकास शुल्क और टैक्स ठीक करवाने के लिए निगम में ऑनलाइन आपत्ति दर्ज करवाई। इसमें विकास शुल्क 75 हजार रुपये और संपत्तिकर करीब 55 हजार रुपये जोड़ा गया था। कर्मचारियों ने करीब डेढ़ माह से इनकी फाइल को लंबित कर बार बार रिवर्ट किया। सभी दस्तावेज पूर्ण होने और निगम की ओर से किए गए रिवर्ट का जवाब देने के बाद कर्मचारियों ने इस फाइल पर दर्ज आपत्तियों को स्वीकृत करते हुए पोर्टल पर बिना त्रुटि ठीक किए ही सही दर्शा दिया। संपत्ति का विकास शुल्क 120 रुपये गज के हिसाब से करीब 12 हजार रुपये बनना चाहिए था लेकिन कर्मचारियों ने इसे 75 हजार कर दिया। जबकि निगम में किसी भी श्रेणी में इतना विकास शुल्क है ही नहीं। 75 हजार रुपये का विकास शुल्क 120 रुपये वर्ग गज की जगह 7500 रुपये वर्ग गज का लगा दिया। जबकि निगम में अधिकतम विकास शुल्क की सीमा 325 रुपये गज की है।
ऐसा ही एक दूसरा मामला वार्ड 18 की मुखीजा कॉलोनी का आया। जिसमें संपत्ति पर करीब चार करोड़ रुपये का बकाया कर दिखाया गया था। संपत्ति मालिक ने इसकी ऑनलाइन आपत्ति दर्ज कराई। निगम ने सभी दस्तावेजों के साथ इसे स्वीकृत भी कर दिया लेकिन कर को नहीं घटाया।
इस बारे में क्षेत्रीय कराधान अधिकारी ने बताया कि टैक्स आंकलन करने का काम निगम के जेई का होता है। इसके बाद अपडेट करने का काम निगम एक्सईएन को लेवल दो पर दिया गया है। संबंधित दोनों मामलों की जांच की जाएगी। अगर इसमें कर्मचारियों की लापरवाही मिली तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।