पानीपत। नगर निगम की प्रॉपर्टी टैक्स ब्रांच में धांधली थमने का नाम ही नहीं ले रही है। एक बार फिर टैक्स ब्रांच में अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर करने का मामला सामने आया है। इसमें खुद लेवल वन स्तर के अधिकारियों ने अपने ही फर्जी हस्ताक्षरों वाली फाइल पकड़ी है। इसके अलावा कुछ ऐसी भी फाइलें हैं, जिनमें डायरी डिस्पैच नंबर से लेकर अधिकरियों की मौका रिपोर्ट तक फर्जी तरीके से तैयार की गई है। अधिकारी भी दलालों के मदद से इनको धड़ल्ले से ऑनलाइन करवा रहे हैं। पूरा खेल फोटोकॉपी वाली फाइलों पर होता है, जबकि ऑरिजनल फाइल निगम से गुम करवा दी जाती है। ऐसा इसलिए ताकि ऑरिजनल फाइल पकड़ में न आए, फोटोकॉपी पर कोई कार्रवाई न हो और स्कैन किए गए हस्ताक्षर आसानी से रिपोर्ट पर जोड़ दिए जाएं। अब जिन निगम अधिकरियों और कर्मचारियों ने इन फाइलों पर फर्जी हस्ताक्षर हो रहे हैं उन्होंने उच्च अधिकरियों को अवगत करवा दिया है, जिस पर बुुधवार को एक बार फिर कार्रवाई की जा सकती है।
हालांकि इससे पहले भी दो बार ऐसे मामले आ चुके हैं जब अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षरों वाली फाइलें पकड़ी गई हों। इन पर कार्रवाई के लिए खुद अधिकारियों ने पुलिस एफआईआर के लिए लिखा हो। सीआईडी की चिट्ठी से लेकर एक्सईएन स्तर के अधिकारियों की पुलिस को लिखित शिकायत के बाद भी आज तक किसी भी दलाल या भ्रष्ट कर्मचारी पर कार्रवाई नहीं हो सकी है। इससे दलालों के साथ निगम कर्मचारियों के हौसले बढ़ गए हैं।
दो दिन पहले भी निगम अधिकारियों ने एक और ऐसी फर्जी फाइल पकड़ी है, जिस पर डिस्पैच डायरी नंबर तक फर्जी लिखे गए हैं। मौके पर जेई की रिपोर्ट तक फर्जी है। रिपोर्ट के नीचे अधिकारियों और कर्मचारियों के हस्ताक्षर भी फर्जी हैं। इस फाइल के लेवल वन और टू करवाकर इसे ऑनलाइन करवा दिया गया है। मामले का खुलासा होने के बाद अधिकारी इसकी जांच पड़ताल में जुट गए हैं। इसे लेकर उच्च अधिकरियों को सूचित तक किया जा चुका है। अब मामले में फिर से एफआईआर दर्ज करवाने की बात कही जा रही है।
फिर पकड़ी गई एक फाइल
टैक्स ब्रांच में लेवल वन करने वाले निगम अधिकारियों ने मंगलवार को एक फाइल और पकड़ी, जिस पर फर्जी तरीके से रिपोर्ट कर अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर किए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस बारे में सबसे पहले वे उच्च अधिकारियों को लिखित में शिकायत देंगे। इसके बाद मामले को सार्वजनिक करेंगे।
होगी कार्रवाई : डीएमसी
अभी ये मामले मेरे संज्ञान में नहीं आए हैं। इनके बारे में निगम अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ की जाएगी। जांच पड़ताल के बाद अगर कोई दोषी मिलता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वहीं एनडीसी का लेवल टू का मामला चारों एक्सईएन स्तर पर ही करवाने की सिफारिश की जाएगी।
- जितेंद्र कुमार, डीएमसी, नगर निगम।