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पीएमएस पोर्टल हुआ बंद, 1.83 लाख संपत्तियों का एनडीसी पर ट्रांसफर हुआ डाटा

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पानीपत। 70 हजार प्रॉपर्टी की खामियों से भरा याशी एजेंसी का सर्वे शहरवासियों पर थोपने के बाद पीएमएस पोर्टल भी अब बंद हो चुका है। इससे शहरवासियों को अब अपनी संपत्तियों को खोजने और नई प्रॉपर्टी आईडी बनवाने में परेशानी हो रही है। जबकि अधिकारियों का कहना है कि पीएमएस पोर्टल पर पूरा डाटा एनडीसी पर अपलोड किया जा चुका है। इसलिए अब उन्हें या शहरवासियों को इसकी आवश्यकता नहीं है। अब संपत्ति का रिकॉर्ड देखने से लेकर आपत्ति दर्ज करवाने तक के लिए एनडीसी पोर्टल का ही इस्तेमाल किया जा सकता है। वहीं, शहरवासियों की सुविधा के लिए निगम ने लेवल-3 तक बनाने की तैयारी कर ली है। यह लेवल शहर की अवैध दर्शायी गई संपत्तियों को वैध करने के लिए होगा। इसके लिए निगम आयुक्त की यूजर आई-डी बनाई जाएगी।
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वहीं, पीएमएस पोर्टल बंद होने और नया डाटा एनडीसी पर अपलोड होने में भी काफी त्रुटियां हुई हैं। इससे शहर में ऐसी संपत्तियों की भरमार हो चुकी है, जिनकी प्रॉपर्टी आईडी तक नहीं है। कुछ मकानों की दो-दो आईडी बनाई गई हैं, तो किसी की एक की भी नहीं। कहीं दो-दो मकानों को जोड़कर एक आईडी बना दी गई है। मैप में वैध एरिया होने के बाद भी आईडी में अवैध दर्शा रहा है।
निगम अफसरों का कहना है कि पुराने और नए सर्वे की करीब 70 हजार प्रॉपर्टियों का मिलान नहीं हो पाया है। अब निगम कर्मचारी इस मिलान को पूरा करने में जुटे हैं। इसमें संपत्तियों के रिकॉर्ड की एक प्रकार से छंटाई की जा रही है। निगम के सामने टारगेट बहुत बड़ा है, लेकिन आश्वासन के अलावा उनके पास भी कोई विकल्प नहीं है। अब किसी भी प्रकार की त्रुटि ठीक कराने के लिए शहरवासियों को पीएमएस पोर्टल के बजाय एनडीसी पोर्टल का उपयोग करना होगा।
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पीएमएस पोर्टल के बंद होने, एनडीसी पोर्टल पर डाटा अपलोड होने की शहरवासियों को जानकारी तक नहीं है। इसलिए रोजाना शहरवासी निगम के दोनों कार्यालयों के चक्कर तक काट रहे हैं। दूसरी ओर एनडीसी पोर्टल पर भी उनकी संपत्तियों की जानकारी या तो अधूरी है और या गलत है। इसके विकल्प तलाशने के लिए लोग दिन भर धक्के खाते हैं और शाम को आश्वासन लेकर लौटते हैं।
आयुक्त करेंगे लेवल-3 : निगम
पीएमएस पोर्टल की अब कोई आवश्यकता नहीं रही। पूरा डाटा एनडीसी पर अपलोड किया जा चुका है। दूसरी ओर शहरवासियों को सुविधा देने के लिए लेवल-3 बनाया जाएगा। इसमें केवल आपातकालीन फाइलों को ही शामिल किया जाएगा, जिसमें सिर्फ वे फाइलें होंगी जो अवैध एरिया से वैध करने के लिए आई होंगी। यह अधिकार केवल आयुक्त के पास रहेगा। अगर आयुक्त चाहें तो वे मुझे या डीएमसी को इनकी शक्ति दे सकते हैं।
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- समयपाल सिंह, क्षेत्रीय कराधान अधिकारी, नगर निगम।
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