पत्रकार वार्ता कर जानकारी देते
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पानीपत। पेट्रोल और डीजल से वैट हटाकर जीएसटी के दायरे में लाने की मांग एक बार फिर उठी है। खुद पेट्रोलियम डीलर्स वेलफेयर एसोसिएशन इसके लिए आगे आई है। एसोसिएशन का दावा है कि इनको जीएसटी के दायरे में ले आएं तो रेट आधे हो सकते हैं। एसोसिएशन ने इसके समेत अपनी चार मांगों को लेकर 23 अगस्त को जंतर मंतर पर चार घंटे धरना देने का फैसला लिया है।
एसोसिएशन की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक इसको लेकर रविवार को पानीपत के मॉडल टाउन स्थित एक होटल में हुई। पेट्रोलियम डीलर्स वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष एडवोकेट संजीव चौधरी ने कहा कि पेट्रोल और डीजल पर केंद्र व प्रदेश सरकार का करीब 56 प्रतिशत टैक्स लगाता है, जबकि जीएसटी मात्र 28 प्रतिशत है। इनको जीएसटी के दायरे में लाने पर पेट्रोल और डीजल के रेट आधे तक आ जाएंगे। पेट्रोल के रेट 58 से 60 और डीजल 40 से 42 रुपये प्रति लीटर हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि अब क्रूड के रेट काफी कम हैं, जबकि खुदरा मूल्य इन सालों में कई बार बढ़े हैं। तेल के रेट बढ़ने से कहीं न कहीं महंगाई पर भी असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक राष्ट्र एक रेट का नारा दिया था। ऐसे में पेट्रोलियम पदार्थों को जीएसटी की श्रेणी में लाया जाए। इसके साथ पंप मालिकों का कमीशन बढ़ाया जाए। यह चार वर्षों से लंबित है। अब पेट्रोल पर 3.17 और डीजल पर 2.07 रुपये कमीशन दिया जाता है। वे पेट्रोल पर 10 और डीजल पर आठ रुपये कमीशन की मांग कर रहे हैं। दो सौ किलो लीटर प्रतिमाह बिक्री के पेट्रोल पंपों को कमीशन के अतिरिक्त आर्थिक राहत पैकेज दिया जाएं। देश में 58 हजार नए पेट्रोल पंपों लगाने का विज्ञापन जारी किया है। इनमें प्रदेश में 9700 पंप लगाए जाने हैं। सरकार इस विज्ञापन को निरस्त करे। सरकार उनकी मांगों को अनदेखा करती है तो पंप डीलर धरने के बाद राष्ट्र स्तर पर बैठक कर संघर्ष की रणनीति तय करेंगे। इसी के आधार पर अपनी मांगों को रखेंगे। इस मौके पर प्रदेश उपाध्यक्ष धीरज, महासचिव संजीव दहिया, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य एडवोकेट वैभव देशवाल, सोनीपत के जिलाध्यक्ष परविंद्र खत्री व बिट्टू सोढ़ी मौजूद रहे।