पानीपत। विधानसभा चुनाव संपन्न होते ही अब लोगों में परिणाम जानने की बेताबी बढ़ गई है। मतगणना हालांकि आठ अक्तूबर को होना है, लेकिन परिणाम को लेकर अभी से
गांव के चौपालों और चौराहों पर कयास लगाए जा रहे हैं।
गौरतलब है कि इस चर्चा में सत्ता पक्ष और विपक्षी दलों के समर्थक अपने-अपने विचार बेबाकी से रख रहे हैं। चौपालों व टोलियों में तो प्रत्याशियों की हार जीत पर शर्त तक लग रही है है। पानीपत शहरी, समालखा विधानसभा सीट व इसराना विधानसभा सीट पर सीधा मुकाबला कांग्रेस-भाजपा के बीच हैं। यहां इन दोनों पार्टियों के प्रत्याशियों पर ही शर्तें लगाई जा रही हैं। पानीपत ग्रामीण सीट के भाजपा, कांग्रेस व निर्दलीय तीनों ही प्रत्याशियों के समर्थक चिंतित होने के साथ साथ विश्वास से लबरेज भी हैं। प्रदेश में जिस प्रकार छह एजेंसियों के सर्वे आए हैं। उससे कांग्रेस में बेहद उत्साह है लेकिन भाजपा के समर्थक इससे नाराज हैं। वह एग्जिट पोल को फेक करार देते हुए भाजपा की सरकार बनने का दावा कर रहे हैं।
इसराना अनाजमंडी में बैठी आढ़तियों व किसानों की टोली भी राजनीतिक चर्चा में मशगूल नजर आई। किसान जय कर्ण जागलान व रणजीत जागलान एक सुर में बोलते है कि प्रदेश में सत्ता विरोधी लहर थी। कांग्रेस की सरकार बनना तय है। लोगों ने कांग्रेस को नहीं ब्लकि सत्ता के खिलाफ वोट दिया है। विकास घनघस ने कहा कि इनेलो-बसपा ने जिस प्रकार वोटों का धुव्रीकरण किया है। इससे परिणाम पर अप्रत्याशित असर हो सकता है। सुरेंद्र सिंह कहते हैं कि भाजपा के वोट साइलेंट है। इसलिए वह बड़ा फैक्टर साबित होंगे।