फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Panipat News: पीडियाट्रिक हाई डिपेंडेंसी यूनिट जल्द होगी शुरू

विज्ञापन
विज्ञापन
पानीपत। जिला नागरिक अस्पताल में पीडियाट्रिक हाई डिपेंडेसी यूनिट तैयार हो चुकी है। यूनिट में डॉक्टरों व नर्सिंग ऑफिसर लिए केबिन बना दिए गए हैं। अब यहां पर वेंटिलेटर इंस्टॉलेशन का काम शुरू होना है। डॉ. भावना को पीएचडीयू की प्रभारी बनाया गया है। यहां पर तीन माह के नवजात से 18 साल तक के गंभीर युवक का इलाज होगा। डॉक्टरों को इन्हें खानपुर या रोहतक पीजीआई रेफर नहीं करना पड़ेगा।
विज्ञापन

वार्ड को तैयार करने के करीब साढ़े 20 लाख रुपये का खर्च आया है। पीएचडीयू को तैयार होने में लगभग ढाई साल का समय लगा है। वहीं जिला नागरिक अस्पताल से रेफरल भी काफी कम होगा। स्वास्थ्य विभाग की ओर से चुनाव के बाद इसका उद्घाटन किया जाएगा। 2021 में आई कोरोना की लहर में स्वास्थ्य विभाग ने पीएचडीयू बनाने की योजना बनाई थी। जिले में पहली और दूसरी लहर में चार हजार से अधिक बच्चे कोरोना संक्रमित हुए। हालांकि 18 साल से कम आयु के किशोरों और बच्चों का रिकवरी रेट 100 प्रतिशत रहा था। प्लानिंग थी कि संक्रमण से गंभीर हालत में पहुंचे बच्चों का इलाज जिला नागरिक अस्पताल की पीएचडीयू में ही हो सके। इसके लिए जनवरी 2021 में ही इसे तैयार किया जाना था लेकिन बजट के अभाव में ये काम अधर में लटका हुआ था। 2022 दिसंबर में बजट जारी हुआ था। अब इस वार्ड में विभिन्न बीमारियों के गंभीर बाल रोगियों को रखा जाएगा।

बॉक्स






एक दिन में खर्च करने पड़ते हैं आठ से दस हजार रुपये



निजी अस्पतालों में बनी पीडियाट्रिक हाई डिपेंडेसी यूनिट और आईसीयू की सेवाओं के लिए लोगों को एक दिन के आठ से 10 हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं। गरीब लोगों के लिए निजी अस्पतालों में बच्चों का इलाज कराना मुश्किल हो जाता है। सरकारी डॉक्टर बच्चों को रोहतक पीजीआई या खानपुर मेडिकल कॉलेज रेफर करते हैं। यहां पर प्रदेश भर से रोगी आते हैं। इसलिए समय पर वार्ड में वेंटिलेटर की सुविधा नहीं मिल पाती। इस लिहाज से ये जिले के लिए बड़ी सौगात है।
विज्ञापन



वर्जन-
पीएचडीयू की प्रभारी डॉ. भावना ने बताया कि पीएचडीयू पर काम चल रहा है। काफी हद तक पीएचडीयू तैयार भी हो चुका है। इसमें बच्चों के लिए अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं होंगी। यह वार्ड तैयार होने से बाल रोगियों के रेफरल में भी कमी आएगी। इसमें 18 साल तक के युवकों का इलाज होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें