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पर्यूषण पर्व : पहला दिन उत्तम क्षमा पर्व के रूप में मनाया

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पानीपत। पर्यूषण पर्व (दसलक्षण धर्म पर्व) का शुभारंभ रविवार को परंपरागत तरीके से किया गया। जैन धर्म के सैकड़ों लोगों ने व्रत रखा। आठ दिन तक हर रोज अलग-अलग आयोजन होंगे। श्री दिगंबर जैन मंदिर और गांधी मंडी स्थित जैन स्थानक में विशेष कार्यक्रम किए गए। इनके साथ अन्य स्थलों पर भी आयोजन किए गए।
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श्री दिगंबर जैन मंदिर जैन मोहल्ला में दस दिवसीय उत्सव का शुभारंभ आज स्थानीय धूमधाम से किया। प्रथम दिवस कल्याण मंदिर विधान का आयोजन किया गया। जिसमें सभी महिला पुरुषों ने भाग लिया। सर्वप्रथम भगवान का अभिषेक व शांति धारा की। इसके पश्चात विधान का आयोजन प्रारंभ हुआ। जिसमें पर्यूषण पर्व का उत्तम क्षमा पर्व धूमधाम से मनाया गया। एडवोकेट मेहुल जैन ने बताया कि भाद्र माह के सुदी पंचमी से ही दिगंबर जैन समाज के दसलक्षण पर्व शुरू होते हैं। पहला दिन उत्तम क्षमा पर्व के रूप में मनाया गया जाता है।

यह दिन क्षमा मांगने और क्षमा करने का होता है। इसमें इंसान ही नहीं पांचों इंद्रीय जीवों के प्रति भी ऐसा भाव रखते हैं। जैन संतों ने बताया कि उत्तम क्षमा धर्म हमारी आत्मा को सही राह खोजने और क्षमा को जीवन और व्यवहार में लाना सिखाता है। जिससे सम्यक दर्शन प्राप्त होता है। संध्या की बेला में महिला मंडल व समाज के बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति दी। इसके बाद श्री जी की भव्य आरती की।
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जैन धर्म में संवत्सरी महापर्व का विशेष महत्व
पानीपत। जैन स्थानक गांधी मंडी में संवत्सरी महापर्व का आयोजन किया गया। यहां दर्जनभर लोग उपवास पर बैठे। अनुपम मुनि महाराज ने कहा कि जैन धर्म में संवत्सरी महापर्व का विशेष महत्व होता है। इसकी सारी गतिविधियां धर्म से जुड़ी हुई हैं। इन आठ दिनों में ध्यान व साधना आत्मा की शुद्धि के लिए की जाती है। इससे वर्षभर जाने व अनजाने में किए गए पाप और बुराइयों से बच सकते हैं। इन दिनों प्रत्येक प्राणी से क्षमा मांगी जाती है। उन्होंने कहा कि इन दिनों क्षमा मांगी जाती है। क्षमा वीरों का आभूषण होता है। वीर महावीर ही दूसरों व शत्रुओं को क्षमा देते हैं।
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