पानीपत। पुर्तगाल में आयोजित इंटरनेशनल व्हीलचेयर एंड एपुटी स्पोर्ट्स (आईडब्ल्यूएएस) वर्ल्ड गेम्स में पानीपत के बुआना लाखू गांव के जेवलिन थ्रोअर नवदीप मलिक ने स्वर्ण पदक जीता है। उन्होंने 43.22 मीटर भाला फेंककर यह पदक अपने नाम किया है। यह चैंपियनशिप 26 से 28 नवंबर तक आयोजित की गई। नवदीप का वर्ल्ड चैंपियनशिप में दूसरा स्वर्ण पदक है। टोक्यो पैरालंपिक में पैर फिसलने के कारण नवदीप चौथे स्थान पर रह गए थे।
पुर्तगाल में पदक जीतने के बाद नवदीप ने अमर उजाला से खास बातचीत में बताया कि वह वर्ल्ड चैंपियनशिप के साथ अन्य खेल प्रतियोगिताओं में भाग ले रहे हैं और दिल्ली में पैरा ओलंपिक की तैयारी कर रहे हैं। वह बुुधवार को स्वदेश लौटेंगे। नवदीप के पदक जीतने से उनके घर में खुशी का माहौल है।
लंबाई कम होने के बावजूद अपने से लंबे खिलाड़ियों को भी चित करने वाले नवदीप को 15 साल की उम्र में कमर में चोट लगने के कारण कुश्ती छोड़नी पड़ी थी। कमर पर ज्यादा चोट थी, इसलिए डॉक्टर ने उन्हें कुश्ती खेलने से मना कर दिया। कमर में चोट लगने के बाद भी नवदीप का खेल का सफर नहीं थमा और उन्होंने कुश्ती छोड़कर भाला थाम लिया। शुरुआत में भाला न होने के कारण नवदीप बॉल फेंक कर ही अभ्यास करते थे।
एफ-41 भाला फेंक खेल में इस समय नवदीप मलिक नंबर वन रैकिंग पर चल रहे हैं। पिछले साल पैरालंपिक-2021 के समय भी नवदीप भारत के नंबर एक खिलाड़ी थे। हालांकि फाइनल में पैर फिसलने से वह पदक से चूक गए थे। उन्हें तब चौथे स्थान से संतोष करना पड़ा था। नवदीप ने बताया कि एशियन गेम्स में उनका लक्ष्य सिर्फ स्वर्ण पदक है। कोच विपिन कसाना उन्हें नए-नए टिप्स के साथ तैयारी करवा रहे हैं। वह अपने शरीर को लचीला बनाने पर ध्यान दे रहे हैं। वहीं नवदीप के पिता का सपना है कि वह अगले पैरालंपिक में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतें।
नवदीप का कद छोटा होने के कारण उनके लिए मेरठ और इंदौर से स्पेशल जेवलिन मंगानी पड़ती है। सामान्य जेवलिन थ्रो करने वाले खिलाड़यों का भाला सात सौ ग्राम का होता है, लेकिन नवदीप और उनकी कैटेगरी के खिलाड़ियों का भाला छह सौ ग्राम का होता है।