शनिवार सुबह आसमान में छाए काले घने मेघ और थोड़ी देर के लिए हुई बूंदाबांदी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी। जिले में करीब 85 हजार हेेक्टेयर फसल खेतों में तैयार खड़ी है। ऐसे में मौसम में बदलाव का असर फसलों पर पड़ेगा। इससे गेहूं की गुणवत्ता और उत्पादन पर भी असर पड़ने की आशंका है।
हालांकि थोड़ी बारिश गेहूं के लिए फायदेमंद है, लेकिन बारिश के तेज आने या ओलावृष्टि से फसल को नुकसान हो सकता है। लगातार में हो रहा बदलाव भी फसल के लिए नुकसानदेह है। शनिवार सुबह तेज हवाओं के साथ हुई बूंदाबांदी ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीर खींच दी। पिछले एक सप्ताह से तापमान अधिकतम 29 डिग्री और न्यूनतम 16 डिग्री सेल्सियस तक रहा। लेकिन बूंदाबांदी होने से एकदम तापमान में गिरावट हुई है।
हालांकि गेहूं की फसल के लिए ठंड फायदेमंद ह,ै लेकिन तापमान घटने और बढने से गेहूं की फसल में बीमारी आने की आशंका बढ़ सकती है। किसान हवा सिंह, बलवान, रामनिवास, जगदीश ने बताया कि मौसम में हुए बदलाव के कारण पीला रतुआ व अन्य बीमारी लगने का डर सताने लग गया है। इससे फसल में नुकसान उठाना पड़ सकता है। जिले में 84 हजार हेक्टेयर में गेहूं की फसल और एक हजार हेक्टेयर में सरसों की फसल खड़ी है।
आज फिर बारिश के आसार
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार रविवार को आसमान में बादल छाए रहेंगे और बारिश होने की संभावना बनी रहेगी। शनिवार को अधिकतम तापमान 25.4 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम तापमान 15.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। हवा की गति 4.6 रही।
गर्मी बढ़ती है तो गुणवत्ता और उत्पादन पर असर
कृषि विभाग अधिकारियों के अनुसार अगर तापमान बढ़ता है तो गेहूं की गुणवता व उत्पादन पर काफी असर पर पड़ेगा। क्योंकि अभी गेहूं की बाली में दूधिया दाना है। गर्मी बढ़ती है तो दाना पिचक जाएगा, इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ेगा और गुणवता में भी कमी आएगी।
बूंदाबांदी होने से ठंड बढ़ी है। जोकि गेहूं की फसल के लिए वरदान साबित होगी। लेकिन गर्मी बढ़ती है तो गेहूं की गुणवत्ता और उत्पादन पर असर पड़ेगा। फिलहाल बारिश गेहूूं की फसल के लिए फायदेमंद है। लेकिन बारिश तेज होती है तो नुकसानजनक होगी।
सुनील मान, एसडीओ, कृषि विभाग, पानीपत।