दलदल में फसी गोवंश को बाहर निकालते हुए लोग।
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हरियाणा के पानीपत जिले के समालखा क्षेत्र के किवाना गांव स्थित गोशाला में प्रबंधन की लापरवाही से भूख के कारण 11 गायों की मौत हो गई, जबकि तीन की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है। इससे नाराज ग्रामीणों ने गोशाला में बंद बेजुबानों को आजाद कर चहारदीवारी से बाहर कर दिया और गोशाला प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। सूचना मिलने पर पशु चिकित्सक शैलेश, चौकी इंचार्ज हरनारायण, सरपंच चैनपाल और ग्रामीण मौके पर पहुंचे।
गोमाता के देश में ही गोवंशों की दुर्दशा हो रही है। पुण्य के नाम पर गोशाला खोलने वाले लोग गायों को मरने के लिए छोड़ दे रहे हैं। किवाना गांव में बनी गोशाला में करीब दो सौ गोवंश हैं। मंगलवार को ग्रामीणों ने पशु चिकित्सक शैलेश को सूचना दी कि गोशाला में गायें मरी पड़ी हैं। साथ ही उन्होंने 112 नंबर पर डायल कर पुलिस को भी सूचित किया। इस पर पशु चिकित्सक डाॅ. शैलेश, चौकी इंचार्ज हरनारायण टीम के साथ मौके पर पहुंचे। डाॅ. शैलेश ने गोवंशों की जांच की।
भूख, दलदल और प्रबंधन की लापरवाही ने मारा
गोशाला की हालत बद से बदतर मिली। जहां गायों को रखा गया था, वह फर्श कच्चा था और वहां राख भी डाली गई थी। इससे पूरा फर्श दलदल बन चुका था। गोवंशों को समय पर चारा-पानी भी नहीं दिया गया था। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि दलदल में फंसने और चारा न मिलने से भूख की शिकार 11 गायों ने दम तोड़ दिया। जबकि तीन की हालत गंभीर थी, जिनका पशु चिकित्सक ने इलाज किया।
सरपंच चैनपाल और ग्रामीणों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि गोशाला प्रबंधन की लापरवाही और अनदेखी से गायों की मौत हुई है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को इसे लेकर ठोस कदम उठाना चाहिए। वहीं हिंदू जन जागरण मंच के प्रधान विकास छौक्कर ने कहा कि प्रबंधन इसके लिए पूरी तरह दोषी है।
गोवंश को गोशाला से छोड़कर किया बाहर
प्रबंधन की लापरवाही के कारण गोवंशों की मौत पर सरपंच व ग्रामीणों ने रोष व्यक्त किया। उन्होंने गोशाला से गोवंश को बाहर गांव में छोड़ दिया। उनका कहना था कि प्रबंधन की लापरवाही से मरने के बजाय बेजुबान गांव में तो किसी तरह अपना पेट भर सकेंगे।
तीन पशुओं का पोस्टमार्टम करवाया गया है। उसकी रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का पता चल सकेगा।
-डॉ. शैलेश, पशु चिकित्सक