पानीपत। मौसम का एक साथ करवट लेना धान की फसल के लिए नुकसानदायक साबित रहा। करीब 13 किलोमीटर घंटे की रफ्तार से चली हवा में धान की फसल बिछ गई। इससे तैयार फसल में पांच से सात प्रतिशत नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है। वहीं मौसम बदलने से ठंड का भी बढ़ गई है।
बुधवार अल सुबह मौसम में एक साथ परिवर्तन आ गया। सुबह ही करीब 13 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से हवा चल पड़ी। कुछ ही देर में खेतों तैयार धान की फसल हवा के झोंके साथ बिछ गई। किसान सुबह खेतों में पहुंचे तो फसल बिछी हुई मिली। राजा खेड़ी गांव निवासी किसान हरलाल और कृष्ण ने बताया कि मौसम की करवट से किसानों को धान की फसल में फायदा कम नुकसान ज्यादा है। धान की फसल गिरने से किसानों को अभी पांच से सात प्रतिशत का नुकसान हो गया है। इसमें इसी तरह बदलाव रहा तो नुकसान बढ़ सकता है। उग्राखेड़ी निवासी रामबीर ने बताया कि बदलते मौसम के कारण धान की फसल को भारी नुकसान होने के आसार सामने आ रहे हैं। तेज हवा से सारी फसल जमीन पर बिछ गई है। जिससे पैदावार पर असर पड़ेगा।
मौसम बदलने के बाद सुबह व शाम के समय ठंड बढ़ गई है। बुधवार को अधिकतम तापमान 33 और न्यूनतम तापमान 19 डिग्री दर्ज किया गया। अब अधिकतम तापमान कम होने का अनुमान है। लोगों ने सुबह व शाम के समय गर्म कपड़ों का सहारा लेना शुरू कर दिया है। खासकर सुबह व शाम को दोपहिया वाहनों पर सफर करने वाले लोगों ने गर्म कपड़े पहनने शुरू किए हैं।
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किसान बरतें सावधानी
कृषि विज्ञान केंद्र उझा के वैज्ञानिक डॉ. राजबीर गर्ग ने बताया कि अब मौसम परिवर्तनशील है। बुधवार को एक साथ तेज हवा चलने से धान की फसल गिरी है। इसमें फिलहाल अधिक नुकसान नहीं हुआ है। बूंदाबांदी की कोई संभावना नहीं है। ऐसे में किसानों को धान में जरूरत पड़ने पर ही हल्की सिंचाई करनी चाहिए।