पानीपत। तीन नए आपराधिक कानून लागू होने के बाद जिले में पहला मुकदमा इसराना पुलिस थाना में भारतीय न्याय संहिता की धारा 127 (6) के तहत दर्ज किया गया। यह गुमशुदगी का मामला है। पहले इस केस में आईपीसी की धारा 346 के तहत केस दर्ज किया जाता था। दूसरा केस तहसील कैंप पुलिस थाना में दर्ज हुआ। यह मारपीट का मामला था। यह घटना 30 जून रात 10 बजे की थी। इसलिए यह केस पुरानी धाराओं में दर्ज किया गया है। अब इस पर संशय बना हुआ है।
इस संबंध में कुछ वकीलों का कहना है कि यह केस नई धाराओं में दर्ज होना चाहिए था, पुलिस का कहना है कि घटना 30 जून की है तो यह पुरानी आईपीसी की धाराओं में दर्ज होगा। अब तक नई भारतीय न्याय संहिता की धाराओं पर संशय बना हुआ है। सोमवार को दिन में नई धाराओं के तहत महज एक केस दर्ज किया गया। आमतौर पर जिले के 17 पुलिस थाना में 20-30 के बीच केस दर्ज होते थे। कभी कभार यह संख्या 50 के आसपास भी पहुंच जाती थी। पुलिस ने 30 जून की रात को 12 बजे से पहले रात 11 बजे व साढ़े 10 के बीच तीन केस दर्ज किए हैं। पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए नए अपराधिक कानूनों की जानकारी के लिए लगातार कक्षाएं आयोजित की जा रही है। पुलिस ने सोमवार को सभी पुलिस थाना व चौकियों में दिन भर कक्षाएं लगाई। पुलिस के विशेषज्ञों ने लोगों के साथ साथ अपने कर्मचारियों को भी बीएनएस, बीएनएसएस व बीएसए का पाठ पढ़ाया है। पुलिस इन कानूनों की जानकारी के लिए नियमित रूप से पुलिस थानों व चौकियों में जागरूकता कार्यक्रम करेगी।
इन मुख्य धाराओं को समझिए
- आईपीसी में हत्या का केस 302 धारा के तहत दर्ज किया जाता था। इसको अब भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) में 103 धारा के तहत दर्ज किया जाएगा।
- जानलेवा हमला को 307 धारा में दर्ज किया जाता था। बीएनएस में 109 धारा के तहत दर्ज किया जाएगा।
- चोरी को 379 धारा के तहत दर्ज किया जाता था। इसको अब बीएनएस में 303 धारा के तहत दर्ज किया जाएगा।
- घर के अंदर घुसकर की गई चोरी को 380 धारा के तहत दर्ज किया जाता था। इसको अब बीएनएस में 305 धारा के तहत दर्ज किया जाएगा।
- लूट को 392 धारा के तहत दर्ज किया जाता था। इसको अब बीएनएस में 309(4) धारा के तहत दर्ज किया जाएगा।
- डकैती को 395 धारा के तहत दर्ज किया जाता था। इसको अब बीएनएस में 310 (2) धारा के तहत दर्ज किया जाएगा।
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कोर्ट व पुलिस के लिए समय सीमा निर्धारित
नए कानूनों के लागू होने पर ट्रायल कोर्ट को हर फैसला अधिक से अधिक तीन साल में देना होगा। महिला के खिलाफ अपराध से संबंधित मामलों में 60 दिन के अंदर जांच पूरी कर कोर्ट में चालान पेश करना होगा। दोषी द्वारा चालान की प्रति प्राप्त करने उपरांत 60 दिन के अंदर कोर्ट में चार्जशीट करना अनिवार्य होगा। नए कानून के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक्स माध्यम व वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से गवाही रिकार्ड की जा सकेगी। मुकदमे में दलीलें पूर्ण होने पर कोर्ट द्वारा 30 दिन में फैसला देना अनिवार्य होगा। अन्य संगीन मामलों में 90 दिन में जांच पूरी कर चालान पेश करना होगा।
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गैंगस्टरों पर नकेल
संगठित अपराध जो बार बार अपराध करते है ऐसे मामलों में अब कठोर सजा फांसी, उम्रकैद के साथ साथ कम से कम 10 लाख रुपये जुर्माना होगा। यह मुख्य रूप से फिरौती मांगना, साइबर अपराध, किडनैपिंग, जमीनों पर कब्जा करने वाले गैंगस्टर पर नकेल कसने के लिए बनाया गया है। संगीन मामलों में पुलिस अब आरोपियों को हथकड़ी लगाकर कोर्ट में में पेश सकती हैं।
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डीएसपी की अनुमति के बाद बुजुर्ग की होगी गिरफ्तारी
नए कानून में छोटे अपराध जिनमें तीन वर्ष से कम की सजा है। उनमें आरोपी यदि 60 वर्ष से अधिक आयु का है तो उसकी गिरफ्तारी के लिए उप पुलिस अधीक्षक या उससे वरिष्ठ अधिकारी की अनुमति लेना अनिवार्य होगा। गंभीर अपराध की सूचना पर घटनास्थल पर बिना विचार करे शून्य एफआइआर दर्ज होगी। इसके अलावा तलाशी अथवा जब्ती की प्रक्रिया के दौरान वीडियोग्राफी कराना अनिवार्य होगा।
वर्जन-
एसपी अजीत सिंह शेखावत ने कहा कि आईपीसी में जहां 511 धाराएं थी , वहीं अब बीएनएस में 358 धाराएं हैं। इसी प्रकार सीआरपीसी में 484 धाराएं थी वहीं अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में 531 धाराएं हैं। पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया है। लोगों के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। अगर घटना 30 जून की है तो आईपीसी की पुरानी धाराओं में केस दर्ज होगा। अगर घटना एक जुलाई की है तो बीएनएस की धाराओं में केस दर्ज होगा।