पानीपत। श्री इच्छापूर्ति हनुमान मंदिर रेलवे कॉलोनी में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन मंगलवार को कथावाचक पंडित शिव नरेश शास्त्री ने मनुष्य द्वारा किए गए पाप-पूण्यों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि मनुष्य द्वारा किए गए पाप-पुण्य की सजा मनुष्य को धरती पर ही मिलती है। जिससे उन्हें अहसास होता है कि उन्होंने जीवन में किस प्रकार की व्यथा को ग्रहण किया है। संसार में भक्ति, ज्ञान और वैराग्य तीन त्रिवेणी है। जिससे मनुष्य को सीखकर आगे की ओर बढ़ना होता है। उन्होंने बताया कि जिस प्रकार राजा को सात दिन में मृत्यु लोक जाने का श्राप दिया गया था। उसी प्रकार मनुष्य द्वारा किए गए पाप-पूण्यों का भी हिसाब परमात्मा द्वारा इसी युग में किया जाता है। मनुष्य द्वारा किए गए पाप का एक ही साधन है श्रीकृष्ण। जिससे हर पाप से मुक्ति मिलना संभव है। कृष्ण की भक्ति से हर विकट परिस्थिति से लड़ा जा सकता है। इस दौरान महिलाओं ने कथा को ध्यानपूर्वक सुना और जीवन में अमल करने की बात कही। संवाद