पानीपत। सरकार ने छह माह के लिए भूखंड विभाजन करवाने वाले शहरवासियों के लिए सब डिवीजन पॉलिसी लागू की थी, लेकिन 26 दिन बीत जाने के बाद भी निगम अफसर इसे लागू नहीं कर सके। इससे न शहरवासियों के अवैध भूखंड नियमित हो पा रहे हैं और न भूखंड विभाजित हो रहे हैं। शहरवासियों को अपनी ही संपत्ति का मालिकाना हक नहीं मिल पा रहा है। निगम अधिकारी इस मामले को अटका कर सिर्फ याशी का सर्वे लागू करवाना चाहते हैं। जबकि शहर के लोग समस्याएं झेलने को मजबूर हैं। उन्हें पॉलिसी होने के बाद भी दलालों के पास जाना पड़ता है।
सरकार ने इस पॉलिसी को लागू करने के लिए करीब पांच महीने पहले घोषणा की थी। इसके बाद 31 अगस्त को पत्राचार करते हुए एक सितंबर को पॉलिसी लागू कर दी थी। अब 26 दिन बीत चुके हैं, लेकिन निगम अफसरों ने एक भी भूखंड का पॉलिसी के तहत न विभाजन किया और न किसी के आवेदन स्वीकार किए। पॉलिसी का समय छह माह के लिए निर्धारित किया गया था, जो अब घटकर सिर्फ पांच माह रह गया है।
सरकार ने माना कि इसे पोर्टल पर अपडेट करने में समय लग सकता है। तब तक के लिए इनके आवेदन मैन्यूअल किए जाएंगे। वहीं, नोटिफिकेशन के साथ नए आवेदन के लिए फॉर्म ए और पुराने भूखंड के हो चुके विभाजन को विनियमित करने के लिए फार्म बी भी भेजे गए थे। इनमें अपनी जानकारी भरने के साथ संपत्ति के कागजात लगाने थे, लेकिन निगम अफसरों ने एक भी आवेदन स्वीकार नहीं किया।
योजना के अंतर्गत शहर में नगर योजनाओं, पुनर्वास योजनाओं और सुधार न्यास योजनाओं के तहत बसी कॉलोनियों के भूखंडों का विभाजन होना था। पहले से हो चुके अवैध भूखंड भी नियमित होने थे। इससे शहर के सुखदेव नगर, मॉडल टाउन, तहसील कैंप, नारायण सिंह पाकर, सब्जी मंडी, कच्चा कैंप समेत 15 कॉलोनियों के हजारों लोगों को फायदा मिलना था, जो निगम अफसरों के तानाशाही रवैये के कारण नहीं मिल पा रहा है।
यह विकट परिस्थिति है कि निगम में सरकारी योजना पर भी अमल नहीं किया जा रहा। इसे लेकर निगम अफसरों से बातचीत की जाएगी। जो भी उपयुक्त और जल्द समाधान निकलेगा, उसे लागू करने का प्रयास किया जाएगा। - दुष्यंत भट्ट, सीनियर डिप्टी मेयर।