पानीपत। शहर के विकास कार्य प्रभावित न हों और आपातकालीन कार्यों के लिए अधिकारियों और शहरवासियों को इंतजार न करना पड़े, इसको लेकर बृहस्पतिवार को नगर निगम आयुक्त यशेंद्र सिंह ने अपनी शक्तियों का वितरण अधिकारियों को कर दिया। इसमें आयुक्त ने किसी भी आपात विकास कार्य को करवाने के लिए एक्सईएन को एक काम के लिए 20 हजार की शक्ति दी है। इस शक्ति के सहारे एक्सईएन लेवल के अधिकारी महीने में 2.5 लाख रुपये तक के काम करवा सकते हैं। इसके अलावा निगम के चीफ और एएमसी के पास 50 लाख रुपये तक के कार्यों की संयुक्त शक्ति प्रदान की है। निगम के एएमसी यानी अतिरिक्त निगम आयुक्त को एक करोड़ रुपये तक के भुगतान की अलग से पावर दी है। इसके अलावा निगम की सफाई शाखा के काम और उसके भुगतान की पावर डीएमसी यानी उप निगम आयुक्त को दी गई है।
निगम आयुक्त की ओर से दी गई पावर डेलीगेट में स्पष्ट जिक्र है कि निगम के चारों एक्सईएन किसी भी पैटी वर्क यानी एमरजेंसी के काम के लिए अपनी शक्तियों का प्रयोग कर इनकी विभागीय अनुमति दे सकेंगे। पहले यह अनुमति सिर्फ निगम आयुक्त ही दे सकते थे। एक्सईएन महीने में ऐसे 2.5 लाख रुपये तक के काम करवा सकेंगे। हालांकि इनके भुगतान की जिम्मेदारी एएमसी के पास ही रहेगी।
20 हजार रुपये से लेकर एक लाख तक की जिम्मेदारी निगम चीफ इंजीनियर को दी गई है। चीफ एक माह में ऐसे पांच लाख रुपये तक के विकास कार्य या एमरजेंसी काम करवा सकेंगे। हालांकि इससे पहले भी चीफ इंजीनियर के पास चारों डिवीजन में तीन-तीन लाख रुपये महीने की शक्ति है। वे महीने में 12 लाख रुपये तक के काम अपनी शक्तियों का प्रयोग कर करवा सकते हैं।
नगर निगम सदन के पास 2.5 करोड़ रुपये तक के विकास कार्यों की प्रशासकीय अनुमति देने की पावर है। इससे ऊपर की शक्ति शहरी स्थानीय निकाय के पास है। एक करोड़ तक की प्रशासनिक अनुमति निगम आयुक्त के पास है। ऐसे में आयुक्त ने अब इस पावर को एएमसी और चीफ को डेलीगेट कर दिया है। इनके अलावा इन अधिकारियों के पास टेंडर, रि-टेंडर, सिक्योरिटी राशि जैसी कई शक्तियां दी गईं हैं। इनमें कई प्रकार की शक्तियों का प्रयोग करने के लिए अधिकारियों को चीफ अकांउट अफसर को भी साथ लेना होगा।
आयुक्त ने कई दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनमेें अधिकारियों को पावर के साथ किए जाने वाले विकास कार्यों का रिकॉर्ड रखने और उनकी जवाबदेही की जिम्मेदारी भी सुनिश्चित की गई है।