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हुनर के बिना कोई देश प्रगति नहीं कर सकता: राज्यपाल

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पानीपत। एसडीवीएम सिटी में कौशल आधारित प्रदर्शनी का उद्घाटन करने के बाद अवलोकन करते हुए राज्यपाल - फोटो : Panipat
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पानीपत। हुनर के बिना कोई भी देश प्रगति नहीं कर सकता है। यह कहना था प्रदेश के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय का। वह सोमवार को पानीपत के एडीवीएम सिटी स्कूल में आयोजित स्किल एक्सपो कम अवेयरनेस वर्कशॉप में पहुंचे थे। इस कार्यशाला का मकसद था युवाओं एवं विधार्थियों को प्रगति के लिए कौशल का महत्व बताना। उन्हें कोई कौशल अपनाने के लिए प्रेरित किया जाए।
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राज्यपाल ने कहा कि जिस देश के पास कौशल है, वहां व्यापार और रोजगार आदि की समस्या नहीं हो सकती है। आज के वैश्विक परिवेश में कौशल के महत्व को समझना बेहद जरूरी है। इसी दिशा में केंद्र सरकार ने कदम उठाए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार देश की बागडोर संभालते ही नया विभाग खोला, जिसे कौशल विकास का नाम दिया गया। यह पहले श्रम मंत्रालय के अधीन हुआ करता था, लेकिन अब पहली बार यह एक अलग विभाग है। उन्होंने कहा कि कौशल प्रशिक्षण के बाद रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। सभी विद्यार्थियों को नौकरियां नहीं दी जा सकतीं, लेकिन कौशल के माध्यम से सभी विद्यार्थी दूसरों को नौकरी जरूर दे सकते हैं। स्किल इंडिया, मेड इन इंडिया पर हमें विश्वास है। सेना से तो देश आगे बढ़ेगा ही कौशल भी एक फोर्स है, जिसमें देश के आगे बढ़ने की पूरी संभावना है। इस मौके पर उन्होंने कौशल आधारित प्रदर्शनी का उद्घाटन और अवलोकन किया। विद्यार्थियों की प्रस्तुति की प्रशंसा की। इस मौके पर सांसद संजय भाटिया, विधायक प्रमोद विज, उपायुक्त सुशील सारवान, पुलिस अधीक्षक शशांक कुमार सावन के अलावा अनेक गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।
सीएम ने हजार तो पीएम ने दिए तीन हजार करोड़
राज्यपाल ने कहा कि उन्होंने कौशल विकास के लिए पलवल में 1000 करोड़ की लागत से तैयार विश्वकर्मा विश्विद्यालय की शुरुआत की है। इसके बेहतर परिणाम होंगे। प्रदेश सरकार ने 2025 तक नई शिक्षा नीति लागू करने का साहसिक निर्णय लिया है। कौशल विकास के लिए प्रधानमंत्री ने तीन हजार करोड़ का पैकेज दिया है। अनेक स्थानों पर 1500 प्रशिक्षण केंद्र बनाए गए हैं, जो कौशल को गति प्रदान कर रहे हैं।
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देश में तीन प्रतिशत कौशल फोर्स
राज्यपाल ने कहा कि कौशल फोर्स का प्रतिशत अलग-अलग देशों में अलग-अलग हैं। ब्रिटेन में 68, जर्मनी में 75, अमेरिका में 52, जापान में 80 और साउथ कोरिया में 96 है, जबकि भारत में महज तीन प्रतिशत है।
शिक्षा के साथ कौशल की जरूरत
सीबीएसई स्किल एजूकेशन के संयुक्त सचिव आरपी सिंह ने कहा कि शिक्षा के साथ कौशल की जरूरत है। युवा शक्ति के बल पर ही हम राष्ट्र का नवनिर्माण कर इसे आज विश्व की बड़ी शक्ति बनाने में सफल रहे हैं। हमारी प्रतिभाशाली युवाशक्ति का आज पूरा संसार लोहा मानता है।
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