पानीपत। हारट्रोन कंप्यूटर सेंटर संचालक विनोद भराड़ा की हत्या के बाद उसकी पत्नी निधि बिल्कुल आजाद घूमती थी। वह अपने प्रेमी सुमित से लगभग रोज मिलने लगी थी । दोनों अक्सर घूमने के लिए उत्तराखंड व हिमाचल प्रदेश जाते थे। इसको देखकर विनोद भराड़ा के परिवार के लोग भी अचंभित थे। विनोद भराड़ा की मौत के बाद आए उसके बीमे की राशि से निधि ने सुमित को 10 लाख रुपये दिए थे। यह 10 लाख रुपये सुमित ने विनोद भराड़ा के हत्यारोपी देव सुनार के परिवार पर खर्च किए थे।
देव सुनार के केस की पैरवी सुमित कर रहा था। उसके बच्चों की फीस व घर का खर्च भी सुमित चला रहा था। देव सुनार को जेल में पैसे भी सुमित ही पहुंचाता था। जब निधि ने लगभग डेढ़ साल पहले पति विनोद भराड़ा के हत्या के केस में गवाही देते हुए देव सुनार को पहचाने से इंकार कर दिया था। निधि केस की पैरवी भी बड़ी लापरवाही से कर रही थी। इस पर विनोद भराड़ा के ऑस्ट्रेलिया निवासी भाई को शक हो गया था। उसको संदेह था कि विनोद की मौत एक सोची समझी बड़ी साजिश है। फिर उसने एसपी अजीत सिंह शेखावत को मैसेज कर दोनों विनोद भराड़ा मर्डर केस की फाइल खोलने की मांग की थी।
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सुमित की निधि के पैसों पर थी नजर
सुमित की नजर निधि के पैसों पर भी थी। वह निधि के पैसों पर ऐश कर रहा था। निधि उसे घुमाने के लिए महंगे होटल में लेकर जाती थी। उसका पूरा खर्च उठाती थी। उसने विनोद भराड़ा की हत्या उसके पैसे हड़पने के लिए भी की थी।
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एसपी अजीत सिंह शेखावत ने बताया कि देव सुनार के केस की पैरवी सुमित कर रहा था। उसके बच्चों की फीस व घर का खर्च भी सुमित चला रहा था। देव सुनार को जेल में पैसे भी सुमित ही पहुंचाता था। जब निधि ने लगभग डेढ़ साल पहले पति विनोद भराड़ा के हत्या के केस में गवाही देते हुए देव सुनार को पहचाने से इंकार कर दिया था। दोनों उत्तराखंड व हिमाचल प्रदेश भी घूमने के लिए जाते थे। मामले की अब भी जांच चल रही है।