स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस सेवाएं ठप, एनएचएम की हड़ताल जारी, एनएचएम के अंतर्गत कार्यरत 350 कर्मचारी सोमवार तक रहेंगे हड़ताल पर
- रविवार को भी एनएचएम कर्मचारियों ने जिला नागरिक अस्पताल के गेट पर सरकार के खिलाफ किया रोष प्रदर्शन
- हड़ताल के कारण एंबुलेंस सेवाएं पूरी तरह की गई बंद
- गर्भवतियों को लाने व डिलीवरी के बाद छोड़ने व सड़क हादसों में घायल लोगों को नहीं मिल रही एंबुलेंस सेवा
फोटो- 21
माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। एनएचएम कर्मचारियों ने सोमवार तक हड़ताल पर रहने का एलान किया है, अगर सरकार ने मांगे नहीं मानी तो एनएचएम कर्मचारी मंगलवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा सकते हैं। हड़ताल में एनएचएम के 350 कर्मचारी शामिल हैं। इनमें 12 डॉक्टर, 33 स्टाफ नर्स, एंबुलेंस चालक, क्लर्क , डाटा एंटी ऑपरेशन समेत स्वास्थ्य विभाग के कई प्रोजेक्ट के अधिकारी व कर्मचारी शामिल हैं। एनएचएम कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से एंबुलेंस सेवाएं पूरी तरह से ठप हो गई है। गर्भवतियों को निजी वाहन से अस्पताल में आना व जाना पड़ रहा है। इससे गर्भवतियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। घटनास्थलों पर भी एंबुलेंस नहीं पहुंच रही है। एंबुलेंस काउंटर पर एंबुलेंस सेवा बंद होने का नोटिस चस्पा किया गया है।
रविवार को भी एनएचएम कर्मचारियों ने जिला नागरिक अस्पताल के गेट पर एकत्रित होकर सरकार के खिलाफ रोष प्रदर्शन किया है। एनएचएम की हड़ताल से मरीजों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ रहा है।जिला नागरिक अस्पताल में दो हड्डी रोग विशेषज्ञ हैं। एक हड़्डी रोग विशेषज्ञ एनएचएम के अंतर्गत है। वह अकसर हड्डी संबंधी सर्जरी करते हैं। दूसरे हड्डी रोग विशेषज्ञ ओपीडी करते हैं। एनएचएम की हड्डी से दो रोगियों की सर्जरी रुक गई है। फिजियोथैरेपी विभाग की प्रभारी डॉ. नेहा बंसल एनएचएम की हड़ताल में शामिल है। इसलिए फिजियोथैरेपी सेवाएं पूरी तरह से बंद है। यहां हर रोज इलाज के लिए 30-40 मरीज आते हैं। इनमें अधिकतर बुजुर्ग शामिल हैं। इनको बिना इलाज ही घर लौटना पड़ रहा है।
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एसएनसीयू वार्ड की सेवाएं भी प्रभावित-
एनएचएम की हड़ताल से एसएनसीयू वार्ड की सेवाएं भी प्रभावित हो रही है। एनएनसीयू का 80 प्रतिशत स्टाफ एनएचएम के अंतर्गत कार्यरत है। यहां के तीन डॉक्टर व 12 नर्सिंग ऑफिसर एनएचएम के अंतर्गत कार्यरत है। अब यहां पर दूसरे वार्डों से नर्सिंग ऑफिसर लगाए गए हैं।
एनएचएम की हड़ताल के कारण सारा कागजी काम ठप हो गया है । एनएचएम कर्मचारियों पर ही स्वास्थ्य विभाग की सभी रोगों की रिपोर्ट तैयार करने, डॉक्टरों व स्टाफ का वेतन बनाने, ढांचागत रिपोर्ट तैयार करने, बजट का लेखाजोखा तैयार करने का जिम्मा है। सरकारी कर्मचारियों की संख्या काफी कम है।
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सरकार जल्द उनकी मांगे माने- मलिक
एनएचएम संघ के जिलाध्यक्ष अमित मलिक ने कहा उनकी हड़ताल से लोगों को परेशानी हो रही है। उन्हें इसका खेद है लेकिन इसकी जिम्मेदार सरकार है। सरकार उनके साथ अन्याय कर रही है। इसलिए उन्हें हड़ताल पर जाना पड़ा। वह एनएचएम के अंतर्गत कार्यरत हैं। आज तक उनको सातवां पे स्केल नहीं दिया गया है। वह सालों से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष करते आए हैं। कोरोना काल में कई कर्मचारियों ने काम करते हुए अपनी जान तक गवां दी थी। स्वास्थ्य विभाग पूर्ण रूप से एनएचएम कर्मचारियों पर निर्भर है लेकिन उनका शोषण हो रहा है। उनकी मांग है कि उन्हें सातवां पे स्केल दिया जाए। उनको पक्का किया जाए, ईएल , चिकित्सा सुविधा, सेवानिवृति पर ग्रेज्युटी व नौकरी की सुरक्षा जाए।