नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के निर्देश अनुसार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सेक्टर-29 स्थित एक उद्योग पर भू-जल दोहन के मामले में एक करोड़ 77 लाख 65 हजार 200 रुपये का हर्जाना वसूली करने और बोरवेल सील करने की संस्तुति की है। बोर्ड ने डीसी को लिखे पत्र में यह हर्जाना वसूलने की सिफारिश की। भू-जल दोहन का मामला एनजीटी कोर्ट में चल रहा है। एनजीटी ने नए आदेेश जारी कर ये साफ कर दिया है कि अब भू जल प्राधिकरण के साथ साथ राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी भू-जल का बिना एनओसी दोहन करने पर हर्जाना वसूल सकते हैं। भू-जल दोहन को रोकने के लिए हर्जाना वसूलने और बोरवेल सील करने की पावर डीसी को दी थी, जिसमें अब बदलाव किया गया है। पिछले वर्ष जांच के दौरान सेक्टर 29 स्थित नेशनल वूलन मिल में सीडब्लूजीए की बिना परमिशन के बोरवेल चलता मिला था। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने छापेमारी की थी। एनजीटी के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी शैलेंद्र अरोड़ा ने बताया कि नए निर्देश उन्हें एनजीटी की ओर से मिल गए हैं इनके अनुसार ही कार्रवाई होगी।