कुरुक्षेत्र। अंबाला के सांसद रत्न लाल कटारिया के निधन से कुरुक्षेत्र में भी शोक की लहर दौड़ गई है। यहां से उनका गहरा नाता रहा है, जिसके चलते हर कोई उनके निधन की खबर से शोकाकुल है। रत्न लाल कटारिया का परिवार लाडवा में ही रहता था। उन्होंने अपनी पढ़ाई कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से पूरी की।
उन्होंने राजनीति शास्त्र से एमए व वकालत की भी पढ़ाई की और फिर लाडवा से ही अपने राजनीतिक जीवन का सफर शुरू किया। इसके बाद वे रादौर व यमुनागर से होते हुए अंबाला पहुंचे, जहां से वे राष्ट्रीय राजनीति के फलक पर भी पहुंचे। केंद्र सरकार में मंत्री बनने के बाद भी रत्नलाल कटारिया का कुरुक्षेत्र लगातार आना-जाना रहा। उन्होंने कुरुक्षेत्र के विकास में अहम योगदान दिया ओर लोग उनके कार्यो और व्यवहार से बेहद प्रभावित थे। वे जब 1987 में रादौर से विधायक बने तो उस समय भी परिवार लाडवा में ही रहता था। लोग बताते हैं कि उनका राजनीति के प्रति शुरू से ही लगाव रहा।
बॉक्स
जब बाल कलाकार के तौर पर नेहरू ने किया था कटारिया को सम्मानित
कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष पवन गर्ग ने रत्न लाल कटारिया के निधन पर गहरा शोक जताया। उन्होंने बताया कि वे सरकार में रेवेन्यू मिनिस्टर व वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन के चेयरमैन रहे । रत्न लाल कटारिया का परिवार लाडवा हल्के में ही रहता है। पिता ज्योतिराम कटारिया लाडवा के पार्षद रह चुके हैं। राजनीति के कई महान पुरुषों का भी इनके परिवार के साथ पारिवारिक संबंध रहा है । अटल बिहारी वाजपेई भी इनके घर आ चुके हैं। कटारिया को 13 वर्ष की आयु में बाल कलाकार के रूप में देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू से सम्मानित होने का गौरव हासिल हुआ था।
बॉक्स
पार्टी संगठन को दी मजबूती
भाजपा नेता धर्मवीर मिर्जापुर, जिलाध्यक्ष रवि बतान व प्रवक्ता रहे विनीत क्वात्रा बताते हैं कि रत्न लाल कटारिया के राजनीतिक अनुभव का कुरुक्षेत्र के कार्यकर्ताओं को बहुत फायदा मिला। उन्होंने जहां प्रदेश अध्यक्ष का जिम्मा संभाला वहीं संघर्ष के दिनों में यहां सरकार की जन विरोधी नीतियों के विरोध में कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर आवाज बुलंद की।
बॉक्स
गीता उपदेश के साक्षी वट वृक्ष बचाने के लिए लिखा था पत्र
रत्न लाल कटारिया के बारे में स्थानीय लोगो के पास अनेक किस्से है। बताया जाता है कि उन्होंने ज्योतिसर में गीता उपदेश के साक्षी वट वृक्ष को बचाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भी लिखा था। उन्होंने मांग की थी कि इस वट वृक्ष के आसपास के एरिया को प्राकृतिक रूप से छोड़ा जाए। उनके भेजे पत्र पर संज्ञान भी लिया गया था। उन्होंने कुछ माह पहले ही केंद्र सरकार से सरस्वती के विकास के लिए 100 करोड़ रुपये का पैकेज देने की मांग की थी।