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मंदी की उद्योगों पर मार-

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पानीपत। टेक्सटाइल नगरी अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। केमिकल और कोयले के दाम बढ़ने से महीने में आठ दिन डाइंग यूनिट बंद करनी पड़ रही है। अब ट्रांसपोर्टेशन महंगा होने और मांग न होने के कारण उद्यमियों ने सप्ताह में एक दिन मिंक इंडस्ट्री बंद करने का फैसला किया है। ट्रांसपोर्टर्स ने भाड़ा कम करने से इनकार कर दिया है। ऐसे में 120 में से 30 मिंक औद्योगिक इकाइयां स्थायी तौर पर बंद हो चुकी हैं। अब मिंक व डाइंग इंडस्ट्री का एक माह पांच सौ करोड़ का कारोबार लगभग बंद हो गया है। मिंक उद्यमी टांसपोर्टेशन के लिए रेलवे से मदद मांग रहे हैं। रेलवे ने उद्यमियों को आश्वासन दिया है कि अगर वे एक ट्रेन का माल उन्हें देंगे तो वो सिलवासा तक स्पेशल ट्रेन चलाएंगे। अब उद्यमी कंबल के रेट 14 प्रतिशत तक बढ़ाने पर भी विचार कर रहे हैं।
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मिंक उद्यमियों के पास माल का ओवरस्टॉक हो चुका है। बाजार में माल की मांग न के बराबर है। धागे का रेट काफी नीचे चला गया है। जो माल उन्होंने तैयार किया है, वह महंगे रेट में तैयार हुआ है। अब उद्योगपति इस बात को लेकर चिंतित हैं कि कैसे माल बेचा जाए। इन तमाम परेशानियों के चलते फेडरेशन ने फैसला किया है कि सप्ताह में एक दिन पानीपत की मिंक इंडस्ट्री बंद रहेंगी। दीवाली पर सात दिन का अवकाश किया जाएगा। जैसे दक्षिण भारत में डिमांड न होने के कारण सप्ताह में तीन दिन इंडस्ट्री बंद रखनी पड़ रही है। अब ट्रांसपोर्टर्स ने भी माल पर ग्रॉस रेट लगा दिया है। पहले सिर्फ माल का भाड़ा लिया जाता था। अब पैकिंग व गत्ते का रेट भी इसमें जोड़ दिया गया है। अब वह ट्रांसपोर्टेशन के लिए ओपन टेंडर भी निकालेंगे।
कोयले और केमिकल के दाम बढ़ने से आहत डायर्स पिछले एक माह से शनिवार और रविवार को उद्योग बंद रख रहे हैं। हर रविवार और शनिवार को शहर के 450 डाइंग हाउस बंद रहते हैं। उद्यमियों ने लेबरों की महीने में चार अतिरिक्त छुट्टियां कर दी हैं। इन चार छुट्टियों का वेतन भी काटा जा रहा है। माह में चार दिन डाइंग यूनिट बंद होने से कपड़ा उद्यमियों को भी माल देर से और महंगा मिल रहा है। डाइंग यूनिट को ऑर्डर नहीं मिल रहे हैं, क्योंकि एक्सपोर्ट कम हो गया है। कोयले का रेट छह से बढ़कर 16 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है। केमिकल के रेट 100 से बढ़कर 200 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है। डाइंग में इस्तेमाल होने वाले सभी पांचों केमिकलों के दाम दोगुने हो गए हैं। लिक्विड ब्रीच का रेट दो से बढ़कर आठ रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है। ऐसे में डाई करना उद्यमियों के लिए तीन गुना महंगा हो रहा है। डायर्स भी अपने रेट 20 प्रतिशत बढ़ा दिए हैं। इससे टेक्सटाइल कारोबार को झटका लग रहा है।
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क्या करें हम मजूबर हैं : प्रीतम
पानीपत इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के प्रधान प्रीतम सचदेवा का कहना है कि भाड़ा बहुत महंगा हो गया है। रेलवे से मदद मांगी जा रही है। गोदाम ओवर स्टॉक हो गए हैं। मंदी की मार उद्योगों पर पड़ रही है। इसलिए सप्ताह में एक दिन उद्योगों को बंद रखने का फैसला लेना पड़ा।
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