समालखा। नई अनाज मंडी स्थित जैन स्थानक में उपेंद्र मुनि ने प्रवचन में मनुष्य को योग करना अनिवार्य बताया है। उन्होंने कहा कि आत्म आनंद पाने के लिए ध्यान, ईश्वर की भक्ति, आत्म-देखभाल और नकारात्मक भावनाओं से दूरी अपनाएं। क्योंकि यह आनंद बाहरी नहीं बल्कि आंतरिक और स्थायी होता है। अपनी स्वयं की प्रकृति को समझें और आंतरिक शांति की ओर बढ़ें जो जीवन के उतार-चढ़ावों के बीच भी स्थिर रहती है। अपने अशांत मन को शांत करने के लिए ध्यान का अभ्यास करें। शांत मन ही आनंद का आधार है। स्वयं को ईश्वर के चरणों में समर्पित करें। जिससे हृदय में भक्ति भाव उत्पन्न हो जो भक्ति योग की शुरुआत है। नकारात्मक विचारों और भावनाओं से दूर रहकर अपने मन में शुद्धता और प्रेम को स्थापित करें। संवाद