पानीपत। देवी मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा का शुक्रवार को चौथा दिन रहा। कथावाचक जीवानुगा शैलवासिनी ने बताया कि भगवान कृष्ण के शरीर को सत, चित और आनंद से बना है। उन्होंने बताया कि भगवान के कर्म दिव्य होते है। भगवान के कार्य में माया का प्रवेश नहीं होता। भगवान सच्चिदानंद है। सांसरिक प्रेम और कृष्ण प्रेम उसी प्रकार से है। जिस प्रकार लोहे और सोने की धातु में अंतर है। सांसरिक प्रेम का आधार स्वार्थ है। जो निस्वार्थ भक्ति करेगा उसे कृष्ण प्रेम प्राप्त होगा। साधना भक्ति करते हुए जब अंत करण शुद्ध हो जाएगा। तब उसे भगवान कृपा से कृष्ण प्रेम प्राप्त होगा। इस दौरान महिलाओंं ने कृष्ण भजनोंं पर झूमकर नृत्य किया।