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यमुना को अमोनिया से बचाने के लिए उद्यमियों को दिया मास्टर प्लान

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पानीपत। यमुना में अमोनिया की मात्रा बढ़ रही है। यमुनानगर, करनाल, पानीपत और सोनीपत के उद्योगों से निकलने वाला अमोनिया यमुना में गिर रहा है। इसे यमुना में प्रदूषण का कारण माना जा रहा है। यमुना को केमिकल रहित बनाने के लिए शुक्रवार को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नमानि गंगे ने उद्यमियों के लिए वर्कशॉप का आयोजन किया। इस दौरान पानी से बीओडी, सीओडी और टीडीएस कम करने की उद्यमियों को जानकारी दी गई।
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वर्कशॉप में उद्यमियों को बताया गया कि किस प्रकार पानी में बीओडी,सीओडी और टीडीएस की मात्रा कम की जा सकती है। हमें किन केमिकल का डाइंग में इस्तेमाल करना है। हमें पानी को ट्रीट करने के लिए कौन सी मशीनें लगानी हैं। नीदरलैंड की एनजीओ सोलेडवर्ड ने उद्यमियों को केमिकल के बारे में जानकारी दी। वर्कशॉप में उद्यमियों ने सीपीसीबी से एसटीपी के पानी की मांग की है। हरियाणा राज्य प्रदषण नियंत्रण बोर्ड ने उद्यमियों को यमुना केमिकल रहित बनाने के लिए एक मास्टर प्लान दिया है। इसी प्लान के तहत अब उद्यमी काम करेंगे।
दिल्ली में हर वर्ष जनवरी और दिसंबर के दौरान यमुना के पानी में अमोनिया की मात्रा बढ़ जाती है। इसका आरोप हरियाणा के चार जिलों पर लगता है। उद्योग सील भी कर दिए जाते हैं। इस बार इस स्थिति से बचने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पहले ही कदम उठा रहा है। यमुना किनारे बसे जिलों के उद्योगों की लिस्ट तैयार की जा रही है।
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उद्यमी टैंकर से यमुना में छोड़ते हैं पानी
बापौली क्षेत्र के कुछ डायर्स एवं कंबल उद्यमी केमिकल युक्त पानी को टैंकर में भरकर यमुना में छोड़ते हैं। इस गैर कानूनी कार्य को सुबह एवं देर शाम किया जाता है। कई क्षेत्रों में ड्रेन में भी छोड़ा जाता है। ड्रेन यमुना में मिलती है इसलिए यमुना सीधे तौर पर मैली होती है।
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यमुना किनारे स्थापित उद्योगों से लिए जाएंगे सैंपल
यमुना के किनारे स्थापित उद्योगों के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सैंपल लेगा। वहां पानी में अमोनिया की मात्रा मिली तो कार्रवाई निश्चित है। इससे पहले भी बोर्ड जनवरी में उद्योगों के सैंपल ले चुका है। इसके अलावा जहां भी यमुना में उद्योगों का पानी गिरता हैं, वहां जांच की जाएगी।
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यमुना के प्रदूषित होने के प्वाइंट
दिल्ली जल बोर्ड के मुताबिक हरियाणा में डीडी-1 और डीडी-2 नहरें हैं। इन नहरों से दूषित पानी यमुना में पहुंचता है। डीडी-2 नहर को उद्योगों से निकलने वाली डाई की मात्रा अधिक होने की वजह से डाई ड्रेन भी कहा जाता है। जिसमें अमोनिया की अधिक मात्रा मौजूद होता है। नहरें पानीपत के गांव शिमला गुजारन के पास एक-दूसरे से मिलती हैं। शिमला गुजरन से नहरें गांव खोजकीपुर गांव के पास यमुना में मिल जाती हैं।
हमें सरकार एसटीपी का पानी दे : राणा
उद्यमी अपनी ओर से पानी को ट्रीट करके छोड़ रहे हैं। एसटीपी में हर रोज 42 एमएलडी पानी ट्रीट होता है। फिर इस पानी को नालों में छोड़ा जाता है। सरकार से अपील है कि वो इस पानी को उद्यमियों को दें ताकि हर रोज तीन करोड़ लीटर पानी का दोहन बच सकें। हमें एनओसी केमिकल की जानकारी दे रही है इसके लिए एनजीओ का आभार।
- भीम राणा, प्रधान डायर्स एसोसिएशन
मास्टर प्लान के तहत उद्यमी करें काम : आरओ
वर्कशॉप में उद्यमियों को बताया गया है कि वो प्राकृतिक रंगों का ही रंगाई में प्रयोग करें। उन केमिकल का इस्तेमाल न करें जिनसे यमुना प्रदूषित हो रही है। उद्यमियों को एक मास्टर प्लान दिया गया है। इसी प्लान के अनुसार उद्यमी काम करेंगे तो यमुना को प्रदूषित होने से बचाया जा सकता है।
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- कमलजीत सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड हरियाणा
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