पानीपत। नगर निगम में विकास कार्याें की निविदा अपने चहेते ठेकेदारों को देने के लिए की गई बंदरबांट की पोल एक गुमनाम शिकायत ने खोल दी है। ग्रामीण विस क्षेत्र के वार्डों में पिछले दिनों लगी निविदाओं के मामले में निगम के जेई से लेकर एक्सईएन स्तर के अधिकारी तक घेरे में आए हैं। शिकायत में अधिकारियों की काम में हिस्सेदारी तक होने के आरोप लगाए हैं।
उपायुक्त ने गुमनाम शिकायत पर संज्ञान लेते हुए निगम आयुक्त से उक्त मामले की सात दिन में रिपोर्ट मांगी है। उपायुक्त के जवाब मांगने पर अधिकारियों के पसीने छूट गए हैं। बता दें कि ठेकेदारों ने टेंडर जारी करने के समय इनका विरोध किया था। तब अधिकारियों ने इनकी कोई सुनवाई नहीं की। अमर उजाला ने इस मुद्दे को 21 जुलाई के अंक में प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया था।
पहले जागे नहीं, अब उड़ी नींद
इस गोलमाल का विरोध करते हुए जब ठेकेदारों हंगामा किया तब भी अधिकारी नहीं जागे। अब एक गुमनाम चिट्ठी ने अधिकारियों की नींद उड़ा दी है। इस चिट्ठी में निविदा की जानकारी समेत स्पष्ट लिखा है कि अधिकारियों ने अपने चहेते और नजदीकी ठेकेदारों को मुनाफे में निविदाए दी हैं। जबकि इन्हीं कामों को करने के लिए दूसरे ठेकेदार निर्धारित से कम दाम में काम करने के लिए तैयार थे। इससे अधिकारियों के निविदाओं में दाम के इस कम व ज्यादा के खेल का भंडाफोड़ हो गया है। एक जानकर ने बताया कि निविदाओं के इस खेल में निगम को करोड़ों रुपये का नुकसान भी होगा।
तीन अधिकारियों के काम पर उठे सवाल
शिकायत में आरोप लगाया है कि निगम के तीन अधिकारियों ने निविदाओं में सांठगांठ की है। यह बड़ा गोलमाल है और दो फर्मों को फायदा पहुंचाया गया है। आरोप लगाए हैं कि कई विकास कार्यों में अधिकारियों की हिस्सेदारी तक है। इनमें कार्यकारी अभियंता, जेई और लेखा विभाग के एक अधिकारी शामिल हैं। शिकायत में आरोप लगाए हैं कि अधिकारियों ने चहेते ठेकेदारों को निविदा में निर्धारित दाम से पांच प्रतिशत तक ज्यादा दाम में काम अलॉट कर दिए। इस पूरे प्रकरण में कई प्रभावी लोगों के नजदीकी शामिल हैं।
नकली और अधूरे कागजातों पर निविदा लेने के आरोप
आरोप हैं कि जिन ठेकेदारों को ये निविदाएं दी हैं, उनके कुछ दस्तावेज भी अधूरे और नकली हैं। बिड कैपेसिटी से लेकर शपथ पत्र तक गलत हैं। स्टांप पेपर का रिकॉर्ड तक नहीं है। फर्म का सेक्शन-2 भी गलत है।
ऐसे समझें गोलमाल से निगम का नुकसान
मान लीजिए एक निविदा एक करोड़ की राशि की है। उसे एक ठेकेदार 25 प्रतिशत कम दाम यानी 75 लाख में करने को तैयार है। दूसरा ठेकेदार उसे निर्धारित दाम से पांच प्रतिशत ज्यादा में कर रहा है। यानी वह इसे 1.05 करोड़ में करेगा। निर्धारित दाम से कम व ज्यादा के खेल में निगम को एक काम 30 लाख रुपये तक नुकसान है। यानी यह पैसा अधिकारी या फर्म की जेब में जाएगा।
वर्जन:
निविदा में इस तरह से गड़बड़ी करना नामुमकिन है। उपायुक्त कार्यालय से भेजी गई शिकायत में शिकायकर्ता का नाम नहीं है। सरकार के निर्देशों अनुसार मामले की जांच की जाएगी।
राहुल नरवाल, आयुक्त, नगर निगम।