पानीपत। किसान भवन की चौधर को लेकर दो गुटों में जंग जारी है। जुबानी जंग अब मारपीट व पुलिस मुकदमों का रूप ले चुकी है। किसान भवन में शांति के माहौल में तनाव बरकरार है। भवन में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। सीटीएम ने किसानों से शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है। भारतीय किसान यूनियन के पूर्व प्रधान सोनू मालपुरिया ने कोर्ट से जमानत मिलने के बाद समालखा किसान भवन में अपने पक्ष की बैठक बुलाई। बैठक में मालपुरिया ने किसान भवन में मंगलवार को हुई मारपीट का ठीकरा प्रशासन पर फोड़ा है। उनका आरोप है कि प्रशासन के इशारों पर उनके पक्ष के किसानों पर हमला किया गया। उन पर ही उल्टा केस दर्ज किया गया है। उनके पक्ष के जगपाल रावल को हाईकोर्ट ने भारतीय किसान यूनियन किसान भवन का प्रधान माना है। वह जल्द ही किसान भवन पर कब्जा लेंगे। आगे क्या करना है, इसकी रूपरेखा तैयार की जा रही है।
दूसरी ओर सूरजभान पक्ष ने बृहस्पतिवार को रविवार को बापौली के सरकारी स्कूल में भाकियू के प्रधान पद के लिए हुए चुनाव की पूरी फाइल सीटीएम व पुलिस को सौंप दी है। उन्होंने चुनाव का प्रस्ताव, प्रक्रिया और डीवीआर सौंपी। सूरजभान का कहना है कि सोनू मालपुरिया आपराधिक प्रवृत्ति के व्यक्ति हैं। वह किसान भवन में अपना कब्जा करना चाहते हैं, लेकिन वह उनसे कमजोर नहीं हैं। हाईकोर्ट ने 20 नवंबर को निचली अदालत में चुनाव पर चल रहे केस पर स्टे लगाया है। चुनाव पर स्टे नहीं है। उन्हें चुनाव में प्रधान चुना गया है।
मंगलवार को हुई मारपीट में 20 किसान घायल हो गए। यहां पड़े खून के धब्बे अब भी उस भयानक मंजर की गवाही दे रहे हैं। एसपी ने यहां भारी पुलिस बल तैनात कर दिया है। संदिग्धों पर नजर रखी जा रही है। किसान भवन में सन्नाटे के बीच तनाव बना हुआ है। सूरजभान पक्ष के लोग किसान भवन में बैठे हैं। सोनू मालपुरिया पक्ष के लोग अलग-अलग जगह बैठकें कर रहे हैं।
सूरजभान पक्ष को राजनीतिक व प्रशासनिक शरण मिली है। हम पर हमला होने से पहले प्रशासन को आरोपियों की साजिश का पता था। प्रशासन की सह पर हम पर हमला किया गया। प्रशासन पूर्व गैंगस्टर दिखाकर मुझे जेल भेजना चाहता है। पुलिस को कोर्ट से भी फटकार लगी है। इस मामले का पीड़ित होने के बावजूद हम पर ही झूठा केस दर्ज किया गया। प्रशासन हमें जेल भेजकर यहां सूरजभान पक्ष का कब्जा कराना चाहता है।
भारतीय किसान यूनियन किसान भवन के पूर्व प्रधान सोनू मालपुरिया का अप्रैल में कार्यकाल पूरा हो गया था। उन्होंने पंचायत में अपना कार्यकाल बढ़ाकर पांच साल कर लिया था। किसानों ने अप्रैल में सर्वसम्मति से कुराड़ गांव के पिंकू देशवाल को यूनियन का नया जिलाध्यक्ष नियुक्त किया था। मालपुरिया ने उनके प्रधान चुने जाने का विरोध किया और अगस्त में बापौली में पंचायत बुलाकर अपने पक्ष के जगपाल रावल को नया प्रधान नियुक्त कर दिया। इसका पिंकू देशवाल ने विरोध किया। सितंबर में पिंकू ने अपने पद से इस्तीफा देकर प्रधानी सूरजभान रावल को सौंप दी लेकिन सोनू मालपुरिया गुट उन्हें प्रधान मानने को तैयार नहीं था। विवाद शांत करने के लिए प्रशासन ने 11 सदस्यीय कमेटी बनाकर नए सिरे से चुनाव कराने का फैसला लिया था। बापौली गांव के सरकारी स्कूल में रविवार को चुनाव को लेकर पंचायत बुलाई गई थी। यहां बहुमत के समर्थन पर सूरजभान को प्रधान चुना था। सोनू मालपुरिया गुट इससे पहले ही इस चुनाव के खिलाफ हाईकोर्ट जा चुका था। इसी विवाद को लेकर मंगलवार को किसान भवन में दोनों पक्षों में खूनी संघर्ष हुआ। इसमें 20 किसान घायल हो गए।
इस मामले के बाकी आरोपियों को भी गिरफ्तार करेंगे। सीसीटीवी कैमरों की जांच की जा रही है। चुनाव संबंधी फाइल ली गई है। किसानों से पूछताछ की जा रही है। इस झगड़े के जिम्मेदारों का पता लगाया जा रहा है। जांच में दोषी पर कार्रवाई की जाएगी। सोनू मालपुरिया के पुलिस पर लगाए गए आरोप निराधार हैं। पुलिस अपना काम निष्पक्षता से कर रही है।
- रेखा देवी, प्रभारी, थाना मॉडल टाउन।