महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस
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पानीपत के तीसरे युद्ध की स्मृति में मंगलवार को शौर्य स्थल काला आंब पर शौर्य दिवस समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। समारोह के दौरान काला आंब "जय भवानी" और "जय शिवाजी" के नारों से गूंज उठा।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "एक हैं तो सेफ हैं" मंत्र को मंच से दोहराते हुए कहा कि 14 जनवरी 1761 को मराठा योद्धा हिंदुत्व की रक्षा के लिए महाराष्ट्र से पानीपत आए थे। विपरीत परिस्थितियों और मौसम का सामना करते हुए उन्होंने आक्रमणकारी अहमद शाह अब्दाली से लोहा लिया। मराठा सेना दोपहर तक जीत के करीब थी, लेकिन एक घटनाक्रम ने युद्ध की दिशा पलट दी। हालांकि, मराठों ने अब्दाली को इतनी क्षति पहुंचाई कि वह अफगानिस्तान लौटने को मजबूर हो गया।
फडणवीस ने इस बात पर जोर दिया कि अगर उस समय उत्तर भारत के शासक मराठों के साथ होते, तो आक्रमणकारी कभी भारत की ओर आंख भी नहीं उठा सकते थे। उन्होंने कहा कि एकता से ही सुरक्षा सुनिश्चित होती है, और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में 2047 तक भारत को एक विकसित देश बनाने का लक्ष्य तय किया गया है।
इस मौके पर केंद्रीय आयुष एवं स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रताप राव जाधव, पूर्व केंद्रीय मंत्री रावसाहेब पाटील दानवे, और केंद्रीय युवा एवं खेल राज्य मंत्री रक्षा देई खड़से ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
समारोह में मुख्यमंत्री फडणवीस ने शौर्य स्थल पर पुष्प अर्पित कर वीरों को श्रद्धांजलि दी। महाराष्ट्र से आए वीर और वीरांगनाओं ने युद्ध कौशल का प्रदर्शन किया, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। शौर्य स्मारक ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रदीप पाटील ने इस कार्यक्रम के महत्व पर प्रकाश डाला और शौर्य स्थल के लिए 10 एकड़ जमीन उपलब्ध कराने की मांग की।