पानीपत। जैन धर्म के सबसे पवित्र दसलक्षण पर्व का रविवार को आठवां दिन रहा। इस दौरान ऋषभदेव का महा मस्ताकाभिषेक किया गया। समाज के लोग पर्व के आठवें दिवस को उत्तम त्याग धर्म के रूप में मनाते हैं। मंदिर में कर्म दहन विधान का भव्य आयोजन किया। सर्वप्रथम श्री जी का अभिषेक व शांति धारा संपन्न की। इसके पश्चात नित्य नियम पूजन के साथ कर्म दहन विधान का शुभारंभ किया।
पानीपत में विराजमान सभी जैन मंदिरों में दसलक्षण पर्व की विशेष पूजन व विधान का आयोजन किया गया। विशेष रूप से श्री दिगंबर जैन आदिनाथ मंदिर हुडा में विशेष पूजन आराधना की। साथ ही भगवान ऋषभदेव का महा मस्ताकाभिषेक किया। श्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर जैन मोहल्ला में विशेष कार्यक्रम किया गया। यहां श्री दिगंबर जैन पंचायत के नवनिर्वाचित प्रधान सुनील जैन व उनकी कार्यकारिणी का स्वागत किया। सुखमाल जैन, रविंद्र जैन व श्रीपाल जैन ने उनको शुभकामनाएं दी। श्री दिगंबर जैन पार्श्वनाथ मंदिर दुंदीवालान में अखंड जोत प्रज्ज्वलित करने का सौभाग्य अनुज जैन परिवार को प्राप्त हुआ।
श्री महावीर जिनालय अग्रवाल मंडी में कल्याण मंदिर विधान का आयोजन किया गया। रविंद्र जैन ने बताया कि भाद्र माह के शुक्ल द्वादशी को दिगंबर जैन समाज के दसलक्षण पर्व का आठवां दिन उत्तम त्याग धर्म के रूप में मनाया जाता है। जिसका भावार्थ है कि जैसे त्याग शब्द से ही पता लग जाता है। इसका मतलब छोड़ना और जीवन को संतुष्ट बनाकर अपनी इच्छाओं को वश में करना है। यह न सिर्फ अच्छे गुणवान कर्मों में वृद्धि करता है बल्कि बुरे कर्मों का नाश भी करता है। छोड़ने की भावना जैन धर्म में सबसे अधिक है, क्योंकि जैन संत सिर्फ घर बार नहीं यहां तक कि अपने कपडे़ भी त्याग देते हैं। वे फिर पूरा जीवन दिगंबर मुद्रा धारण कर रहते हैं। इंसान की शक्ति इससे नहीं परखी जाती की उसके पास कितनी धन दौलत है, बल्कि इससे परखी जाती है कि उसने कितना छोड़ा या कितना त्याग किया है। संध्या में सांस्कृतिक कार्यक्रम और आरती की गई।