फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Panipat News: धरती के भगवान, जिन्होंने हजारों को दिया नया जीवन

विज्ञापन
विज्ञापन
पानीपत। आज विश्व चिकित्सक दिवस है। चिकित्सकों का हमारे जीवन में महत्ता को दर्शाने के लिए हर साल एक जुलाई को विश्व चिकित्सक दिवस मनाया जाता है। शहर के सरकारी व निजी स्वास्थ्य केंद्रों में लगभग 750 डॉक्टर कार्यरत हैं। सरकारी सेवाओं में 60 डॉक्टर कार्यरत हैं। डॉक्टरों को भगवान क्यों कहा जाता यह वे कोरोना काल में साबित कर चुके हैं।
विज्ञापन

कोरोना काल में तीन डॉक्टर मरीजों का इलाज करते हुए अपनी जान भी गवां बैठे। अब नित नई बीमारियां सामने आ रही हैं, ऐसे में डॉक्टरों का महत्व और बढ़ गया है। एक डॉक्टर को होना कितना जरूरी है, यह कोई बीमार व्यक्ति की बता सकता है। अपवाद को छोड़ दें तो डॉक्टर भगवान, मित्र और अभिभावक की भूमिका बखूबी निभा रहे हैं। डॉक्टर इलाज से हमें न सिर्फ स्वस्थ करते हैं, बल्कि स्वस्थ वातावरण का भी निर्माण करते हैं।

फोटो-
बॉक्स

पंद्रह स्वास्थ्य केंद्रों में डिलीवरी शुरू करा, गर्भवतियों को उपलब्ध कराया इलाज
सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा ने जुलाई 2022 में कार्यभार संभाला था। उस वक्त महज सिविल अस्पताल समेत चार स्वास्थ्य केंद्रों में ही डिलीवरी की सुविधा उपलब्ध थी। इन्होंने अपने प्रयासों से 15 और स्वास्थ्य केंद्रों पर डिलीवरी सेवाएं शुरू कराई। ऐसे में गर्भवतियों का उनके नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रसव संपन्न कराया गया। उनके प्रयास से सैकड़ों गर्भवतियों की जान बची।
विज्ञापन


बॉक्स फोटो-

सरकारी सेवाओं में बनाया पानीपत को नंबर वन
डॉ. संजीव ग्रोवर पर 200 बेड के सरकारी अस्पताल में बेहतर सेवाएं मुहैया कराने का जिम्मा है। मरीजों को बेहतर सेवाएं देने, अस्पताल के रखरखाव व डॉक्टरों में सेवा भाव जगाने के लिए इन्होंने बेहतर काम किए। सरकारी सेवाओं के मामलों से संबंधित एनक्वास में पानीपत प्रदेश में नंबर वन बना और 50 लाख रुपये का इनाम जीता।



बॉक्स फोटो-
सैकड़ों बच्चों की बचा चुके हैं जान

अध्यक्ष इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं रेनबो अस्पताल के निदेशक डॉ. गिरीश अरोड़ा बाल रोग विशेषज्ञ है। डॉक्टरों के हितों के लिए हमेशा लड़ाई लड़ते आए हैं। कोरोना काल में जब बच्चों का पर कोरोना का आक्रमण हुआ तो इन्होंने 24 घंटे तक अस्पताल में काम किया। अपने 20 साल के कॅरिअर में अब तक सैकड़ों बच्चों की जान बचा चुके हैं।


बॉक्स फोटो-
लोगों के दोबारा धड़काए दिल
बालाजी अस्पताल के डॉ. राजीव कुमार ह्दय रोग विशेषज्ञ हैं। हमेशा विशेष शिविर लगाकर लोगों को ह्दय रोगों के खिलाफ जागरूक भी कर चुके हैं। अब 10 साल के करिअर में अब तक हजारों लोगों के दोबारा दिल धड़का चुके हैं।


बॉक्स फोटो-
कोरोना में कमांडर कहलाए-

डॉ. प्रेम अस्पताल के डॉक्टर डॉ. अभिनव मुटनेजा कोरोना काल में कमांडर कहलाए। मानव सेवा के लिए आगे आए। जब लोग ऑक्सीजन के लिए लोग छटपटा रहे थे तो ये अपने स्टाफ के साथ मरीजों को अस्पताल लाकर उन्हें नया जीवन दे रहे थे। हर साल इनके कैंसर अस्पताल में 50 लोगों को नया जीवन मिलता है।


बॉक्स फोटो-
12 हजार लोगों की कर चुकी सर्जरी

नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. शालिनी मेहता 2009 से सरकारी सेवाओं में हैं। अपने 14 साल के कॅरिअर में अब तक 12 हजार लोगों की सर्जरी कर उन्हें दृष्टि दे चुकी हैं। हमेशा मानव सेवा के लिए कार्य भी करती रही। दूसरों के लिए अपनी कार्य भाव से उदाहरण भी पेश किए।


बॉक्स फोटो-

दो हजार से अधिक प्रसूताओं व नवजातों को दिया नया जीवन

सिविल अस्पताल की महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. लिपिका ने हाल में पहली बार अस्पताल में मोलर गर्भावस्था की सर्जरी कर नई पहल की थी। अपने 13 साल के कॅरिअर में अब तक दो हजार से अधिक सिजेरियन डिलीवरी कर जच्चा बच्चा को नया जीवन दे चुकी है। हमेशा ऑनकॉल ड्यूटी पर सर्तक रहकर किसी भी स्थिति में अस्पताल पहुंचकर बेहतर सेवाएं दे रही हैं।

बॉक्स फोटो-

हजारों की मनोस्थिति कर चुकी हैं ठीक
मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. मोना नागपाल 14 साल से सिविल अस्पताल में अकेले मरीजों की मनोस्थिति संभाल रही हैं। अब तक 200 से अधिक लोगों का नशा छुड़ा चुकी हैं। हजारों लोगों की मनोस्थिति को ठीक कर उन्हें नया जीवन दे चुकी हैं। अकसर युवाओं को आत्महत्या जैसे कदम के खिलाफ जागरूक करती हैं।



साबित किया क्यों कहते हैं डॉक्टरों को भगवान
आईबीएम अस्पताल के संचालक डॉ. गौरव श्रीवास्तव ने साबित किया है कि डॉक्टरों को भगवान का दूसरा रूप क्यों कहते हैं। जब कोरोना काल में आईसीयू बेड नहीं मिल रहे थे तब इन्होंने अपने घर पर आईसीयू तैयार कर दिया था। कोरोना काल में इन्होंने 500 से अधिक लोगों का जीवन बचाया।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें