किसानों की वर्षों पुरानी मांग पूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
इसराना। पानीपत से गोहाना रेल लाइन पर नौल्था रेलवे स्टेशन के पास खेतों में जाने वाले रास्ते पर 6.81 करोड़ की लागत से लिमिट हाई सब वे (एलएचएस) बनाने के लिए हरियाणा सरकार ने प्रशासनिक मंजूरी दी है। एलएचएस बनने से नौल्था गांव के सैकड़ों किसानों की कई दशक पुरानी मांग पूरी होगी। किसानों को अब अपने खेतों में जाने के लिए आठ किमी लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है। किसानों द्वारा लंबे समय से इस रास्ते पर कोई अंडरपास बनाने की मांग की जा रही थी। पीडब्ल्यूडी द्वारा अब इस एलएचएस के बनाने के लिए 6.81 करोड़ रेलवे के पास जमा करवाए जाएंगे और फिर रेलवे द्वारा ही इस सब वे का निर्माण करवाया जाएगा। इसराना हलके से विधायक बलबीर बाल्मीकि ने पिछले वर्ष विधानसभा में गांव नौल्था के किसानों की इस मांग को रखा था और उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला द्वारा किसानों की समस्या का समाधान करवाने का आश्वासन दिया गया था।
किसान मनोज जागलान, रामफल, विनोद जागलान व पवन शर्मा ने बताया कि पानीपत से रोहतक रेलवे लाइन 1975-76 में डाली गई तो रेलवे ने नौल्था गांव में नए बने रेलवे स्टेशन के पास खेतों में जाने वाले रास्ते को बंद कर दिया गया। नौल्था के सैकड़ों किसानों की रेलवे लाइन के दूसरी तरफ जमीन है और किसानों को रेलवे द्वारा रास्ता बंद करने से करीब आठ किलोमीटर वाया ब्राह्मण माजरा रोड घूमकर खेतों में जाना पड़ता था। हालांकि उस वक्त किसानों की समस्या को देखते हुए अस्थायी तौर पर रास्ता खोल दिया गया और किसान पिछले कई दशक से अपनी जान जोखिम में डालकर खेतों में जाने के लिए रेलवे लाइन पार करते रहे। वहीं रेलवे ने अब करीब ढाई साल से इस खेतों में जाने रास्ते पर स्लीपर लगाकर पूरी तरह से बंद कर दिए जाने अब किसानों को लंबा रास्ता तय कर खेतों में जाना पड़ रहा है। नौल्था के सैकड़ों किसान अपनी इस समस्या को लंबे समय से उठा रहे थे और अब जाकर किसानों को समाधान की उम्मीद जगी है।
पीडब्ल्यूडी के एसडीओ रामपाल जागलान ने बताया कि रेलवे ने एलएचएस बनाने के लिए पीडब्ल्यूडी को एस्टीमेट बनाकर दिया गया था। हरियाणा सरकार ने अब नौल्था गांव से रेलवे स्टेशन के पास से होकर खेतों में जाने वाले रास्ते पर 6.81 करोड़ की लागत से लिमिट हाई सब वे बनाने की मंजूरी दे दी है। इस एलएचएस को बनाने के लिए पीडब्ल्यूडी द्वारा अब रेलवे के पास 6.81 करोड़ रुपये जमा करवाए जाएंगे और फिर रेलवे उसे बनाएगा।