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माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। मनुष्य हमेशा इच्छाएं रखता है। यही उसके दुख का बड़ा कारण है। व्यक्ति को सुखी होने के लिए अपनी इच्छाओं को पीछे छोड़ना होगा।
ये बातें श्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर जैन मोहल्ला में पुष्पगिरी प्रणेता गणाचार्य 108 पुष्पदंत सागर ने कही। उन्होंने कहा कि मनुष्य की सफलता का एक ही मंत्र है, उसकी सकारात्मक सोच है। आज इंसान हर चीज में कमी निकालने का कार्य करता है, वह हमेशा इसलिए परेशान रहता है। आज इंसान अपने दुख से नहीं बल्कि दूसरे के सुख से दुखी है। इंसान अपनी इच्छाओं पर कंट्रोल खो चुका है। आज का व्यक्ति ये नहीं समझ पा रहा है कि जब चक्रवर्ती, नारायण, प्रतिनारायण जैसे महापुरुषों की इच्छाएं पूर्ण नहीं तो आपकी कैसे होगी, सबकुछ होते हुए भी इंसान इच्छाएं बनी रहती हैं। वहीं उसका दुख का कारण भी है। इतिहास उठाकर देखें चक्रवर्ती को भगवान बाहुबली चक्र चलाने की क्या जरूरत थी जो चक्रवर्ती छह खंड का स्वामी है जिसके पास सब कुछ होते हुए भी उसकी इच्छा नहीं खत्म हुई। मगर जब चक्रवर्ती का मुकुट बाहुबली भगवान आगे झुकता है तो बाहुबली को भी तुरंत केवल ज्ञान का प्राप्त हो जाता है। इंसान के एक जन्म में असंख्य इच्छाएं पैदा होती हैं और इच्छाएं कितनी भ्रमित करती हैं कि हम हमेशा बेचैन रहते हैं। जैसे सब कुछ होते हुए भी चक्रवर्ती बेचैन इच्छाएं कभी खत्म नहीं होती। उन्होंने कहा कि जिंदगी का आनंद लेना है तो ह्रदय को उदार बना लीजिए जिंदगी सफल हो जाएगी और सारी इच्छाएं बह जाएंगी। इस अवसर क्षुल्लक पर्व सागर व क्षुल्लक प्रशांत सागर भी विराजमान रहे।