समालखा। 75वें वार्षिक निरंकारी संत समागम का रविवार को शुभारंभ हो गया है। समागम में देश विदेश से लाखों अनुयायी पहुंचे। हजारों सेवादार सेवा में जुटे रहे। समागम स्थल पर लाखों लोगों के ठहरने की व्यवस्था की गई है। समागम का उद्घाटन माता सुदीक्षा महाराज ने किया।
संत समागम सेवा के शुभारंभ के अवसर पर संपूर्ण निरंकारी जगत एवं प्रभु प्रेमीजनों को संबोधित करते हुए सुदीक्षा महराज ने सेवाभाव का मर्म समझाया। कहा कि सेवा की भावना पूर्ण समर्पण वाली होनी चाहिए। सेवा भाव हुक्मानुसार एवं मन को पूर्णत: समर्पित करके किया जाता है तभी वह सार्थक कहलाता है। सेवा केवल कार्य रूप में नहीं की जाती है। सेवा को सदैव चेतना से करना चाहिए और यह ध्यान रखते हुए कि कभी हमारे कर्म, व्यवहार से जाने अनजाने में भी किसी का तिरस्कार न हो। इसी भक्ति भाव से सेवा को स्वीकार करें और मन से सिमरन करते हुए अपनी सेवाओं का योगदान देते चलें।
समागम में देश-विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु एवं प्रभु प्रेमीजन सम्मिलित होंगे। समागम स्थल पर प्रतिदिन अनेक महात्मा, सेवादल के सदस्य सेवाएं प्रदान करेंगे। समागम स्थल पर विभिन्न प्रबंधन कार्यालय, प्रकाशन स्टाल, प्रदर्शनी, लंगर, कैंटीन एवं डिस्पेंसरी की सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी। यातायात प्रबंधन के अंतर्गत इस वर्ष भी रेलवे स्टेशन, बस अड्डे और हवाई अड्डे से समागम में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को लाने एवं ले जाने की व्यवस्था की जा रही है। साथ ही वाहनों के लिए पार्किंग क्षेत्रों की भी व्यवस्था की गई है। अनेकता में एकता का अनुपम दृश्य प्रदर्शित करने वाला यह दिव्य संत समागम हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी भक्तों के लिए प्रेरणादायी एवं आनंददायक होगा। इस मौके पर संत निरंकारी मंडल कार्यकारिणी समिति के सदस्य, केंद्रीय योजना एवं सलाहकार बोर्ड के सदस्य, सेवादल के अधिकारी, स्वयंसेवक और दिल्ली एवं आसपास के क्षेत्रों के अतिरिक्त अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्त सम्मिलित हुए। सुदीक्षा महाराज का अभिनंदन समन्वय समिति कमेटी अध्यक्ष सुखदेव एवं संत निरंकारी मंडल के सचिव जोगेंद्र सुखीजा ने किया।