पानीपत। सिविल अस्पताल में डिप्लोमा ऑफ नेशनल बोर्ड कोर्स के छात्र डॉक्टर एक साल से बिना लैब और पुस्तकों के ही पढ़ाई कर रहे हैं। इनको अब तक महिला का मृत देह भी उपलब्ध नहीं कराया गया है। इससे डॉक्टर को शरीर की संरचना, अंदरूनी अंगों की जानकारी मिलनी थी। इसके अलावा महिला आकृति वाली एक डमी व अन्य उपकरण का होना भी आवश्यक है। इन संसाधनों के अभाव में ऐसे में ये डॉक्टर कैसे विशेषज्ञ बनेंगे, ये बड़ा सवाल है।
2021 में हरियाणा सरकार ने विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को पूरा करने के लिए सिविल अस्पताल में डिप्लोमा आफ नेशनल बोर्ड (डीएनबी) कोर्स शुरू कराया था। नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन (एनबीई) से अस्पताल को गायनोकोलाजिस्ट की दो सीट मिली थी। पहले बैच का एक साल पूरा हो चुका है, दूसरे बैच में दो एडमिशन और होने वाले हैं। अब सिविल सर्जन ने अस्पताल प्रशासन को 25 दिसंबर तक डॉक्टरों के लिए लैब तैयार करने और पुस्तकों को खरीदने के निर्देश दिए हैं। सिविल सर्जन कार्यालय की ओर से अस्पताल को साढ़े सात लाख रुपये भी ट्रांसफर किए गए हैं। अब अस्पताल प्रशासन ने गायनोकोलोजी विभाग की अध्यक्षा एसएमओ डॉ. शशि लता से सामान की डिमांड भी ली है।
डीएनबी तीन साल का पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स है। यानि हर साल दो छात्रों की वृद्धि होती रहेगी। एक सीट सरकारी डाक्टर व एक निजी प्रेक्टिशनर के लिए आरक्षित है। पहले बैच का एक साल पूरा हो चुका है, दूसरे बैच की तैयारी है। गायनोकोलाजी विभागाध्यक्ष डॉ. शशिलता प्रशिक्षण दे रही हैं। डा. मनी और डॉ. लिपिका भी प्रशिक्षण कार्य में सहयोग करती हैं। लाइब्रेरी का फेब्रिकेशन मटेरियल से ढांचा तैयार है।
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डॉक्टरों से समान की डिमांड ले ली गई है- डिप्टी एमएस
सिविल सर्जन कार्यालय की ओर से साढ़े सात लाख रुपये बजट मिल चुका है। नोडल अधिकारी डॉ. सुरजीत और डॉ. शशिलता से डिमांड ले ली गई है। पुस्तकों, कंप्यूटर सहित तकरीबन आठ लाख रुपये का सामान खरीदा जाएगा। लैब को जल्द शुरू कर देंगे।
डॉ. अमित पोरिया, डिप्टी एमएस सिविल अस्पताल