इसराना। अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन खिलाड़ी कुहू गर्ग अब बैडमिंटन के साथ पुलिस की वर्दी में भी धाक जमाएगी। उनका हाल ही में यूपीएससी में चयन हुआ है। वे 178वां रैंक लेकर आईपीएस बनीं। वे अपने पिता अशोक कुमार गर्ग उत्तराखंड पुलिस के पूर्व डीजीपी की तरह वर्दी पहनना पसंद करेंगी।
भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयनित और अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन खिलाड़ी कुहू गर्ग रविवार को अपने पैतृक गांव कुराना में पहुंची। ग्रामीणों ने उनका जोरदार स्वागत किया और अपनी बेटी को पलकों पर बैठाया। उनके साथ उनके पिता उत्तराखंड के पूर्व पुलिस महानिदेशक एवं राई खेल विश्वविद्यालय के कुलपति अशोक गर्ग, उनकी माता अलकनंदा, ताऊ नरेश गर्ग, भाई मनोज गर्ग और प्रमोद गर्ग साथ रहे। कुहू गर्ग ने परिवार के सदस्यों के साथ गांव में पारंपरिक रीति रिवाज के साथ अपनी कुलदेवी की पूजा अर्चना की। उन्होंने गोशाला में गायों को चारा खिलाया। कुहू गर्ग ने बताया कि अपने पैतृक गांव में सम्मान पाकर बहुत खुश है। उन्होंने ग्रामीणों का आभार प्रकट किया और कहा कि उनके यहां तक पहुंचने में उनका प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर कहीं न कहीं साथ रहा है। उन्हें यूपीएससी में चयन होने पर गर्व महसूस हो रहा है। वह निश्चित तौर पर देश और समाज की सेवा अच्छे से करेंगी। पीड़ितों को न्याय दिलवाना उनकी प्राथमिकता रहेगी।
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चोट बनी लक्ष्य तक पहुंचाने का माध्यम : कुहू गर्ग
कुहू गर्ग ने बताया कि वह बैडमिंटन की एक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी रह चुकी हैं। उसको 2021 में खेल के वक्त एक बड़ी चोट लगी तो उस चोट से उबरने के लिए डेढ़ साल लगा। उस समय लॉकडाउन लगा हुआ था। उन्हें स्वास्थ्य संबंधी काफी समस्याएं आने लगीं, लेकिन चोट को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। उन्होंने करीब डेढ़ साल तक पढ़ाई कर लगातार मेहनत की और इस लक्ष्य को हासिल किया। कुहू गर्ग ने बताया कि उनके पिता ने इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए मार्गदर्शन किया। अपने पिता की लिखी तीन पुस्तक और ऑनलाइन कोचिंग व सामान्य ज्ञान ने लक्ष्य तक पहुंचाने का रास्ता आसान हुआ
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एक माता-पिता के लिए सबसे बड़ा सम्मान : अशोक गर्ग
उत्तराखंड के पूर्व डीजीपी और राई स्पोर्ट्स विश्वविद्यालय के कुलपति अशोक कुमार गर्ग ने बताया कि उन्हें अपनी बेटी की उपलब्धि पर बहुत गर्व है। एक माता-पिता के लिए इससे बड़ा कोई सम्मान नहीं होता है। उनकी बेटी ने यह मुकाम हासिल किया है।