पानीपत। स्थानकवासी जैन समाज द्वारा गांधी मंडी, अग्रवाल मंडी व अंसल में महावीर जयंती महोत्सव मनाया गया। भगवान महावीर के जन्म की नाटिका प्रस्तुत की गई और उनसे संबंधित एक ओपन बुक एग्जाम की भी व्यवस्था की गई।
गांधी मंडी में पदम मुनि महाराज ने भगवान महावीर के जीवन पर प्रवचन दिया। उन्होंने कहा कि यहां अब 24 घंटे का अखंड णमोकार महामंत्र का जाप गतिमान है। अग्रवाल मंडी में प्रभात फेरी निकाली गई, महासाध्वी सुनिधि का प्रवचन हुआ। उधर अंसल में प्रभात फेरी निकाली गई। जो ज्ञानानंद चौक से प्रारंभ होकर बांके बिहारी मंदिर, बीटा बूथ, भगवान महावीर वाटिका व स्वाध्याय केंद्र से होते हुए जैन स्थानक अंसल पहुंची। जहां पर ध्वजारोहण किया गया।
दम मुनि महाराज ने कहा कि जैन वांग्मय में भगवान महावीर के 27 भवों का विस्तृत वर्णन मिलता है। इसमें तीसरे भव में राजकुमार मरीचि के पितामह प्रथम तीर्थंकर ऋषभ देव, पिता प्रथम चक्रवर्ती भरत थे। भगवान स्वयं आगे चलकर प्रथम वासुदेव फिर चक्रवर्ती और अंतिम 27वें भव में तीर्थंकर बने। तीर्थंकर के भव में अपने साधना काल में उन्हें बहुत सारे परीषहों व उपसर्गों का सामना करना पड़ा। उन्होंने उन्हें बड़ी समता पूर्वक सहन किया। उन्हें विभिन्न प्रकार के कष्ट देने वालों को भी क्षमा कर दिया, जबकि तीर्थंकर स्वयं अनंत शक्ति के स्वामी माने जाते हैं। इसीलिए कहा जाता है कि क्षमा वीरों का भूषण होता है। इस मौके पर जगदीश जैन, गौतम जैन, राजेंद्र जैन, डाॅ. एपी जैन, डाॅ. ईश्वर जैन, भगत महावीर जैन, राजीव जैन, संजय जैन, अभिषेक जैन व अंजलि जैन मौजूद रहीं।