पानीपत। अंसल सिटी स्थित निजी अस्पताल में एक प्रसूता के बच्चे को बेचने के मामले में निजी अस्पताल के डॉक्टरों की मुश्किलें बढ़ गई है। अस्पताल के डॉक्टरों ने डिलीवरी प्रिया की की थी लेकिन कागज उषा के नाम के तैयार किए गए थे। अस्पताल में कहीं भी प्रिया के कागज तैयार नहीं किए गए। डिलीवरी से पहले अल्ट्रासाउंड प्रिया का किया गया था, लेकिन अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट उषा के नाम की तैयार की गई है।
डॉक्टरों ने यह दिखाने का प्रयास किया था कि यहां डिलीवरी उषा की हुई है। इसके बाद प्रिया के बच्चे को दिल्ली के पटेल नगर निवासी उषा को दे दिया गया। उषा का कहना है कि प्रिया ने उसे बच्चा दिया है। प्रिया को इस अस्पताल के डिलीवरी के लिए हरिनगर की आशा वर्कर लेकर गई थी। इसके बाद समाजसेविका मोना शर्मा ने डॉक्टरों से मिलकर उषा के कागज तैयार करवाए थे। अब सिविल सर्जन ने निजी अस्पताल के डॉक्टरों व आशा वर्कर की जांच के निर्देश दिए हैं।
वधावाराम कॉलोनी निवासी प्रिया पत्नी शैलेंद्र ने बताया कि वह कपड़े के गोदाम में काम करती है। वह एक बेटे व एक बेटी की मां है। वह नौ माह की गर्भवती थी। उसको एक महिला मोना शर्मा नाम की मिली। उसने उसे कहा कि वह उसकी डिलीवरी अंसल स्थित एक निजी अस्पताल में करवा देगी। मोना शर्मा तीन अप्रैल को उसे निजी अस्पताल में ले गई। यहां उसने लड़के को जन्म दिया। डॉक्टर ने उसकी आंखों के सामने बच्चे की जांच की थी। बच्चा जन्म के बाद ही रोने लगा था। इसके बाद उसको होश नहीं रहा। चार अप्रैल को उसको होश आया तो उसने डॉक्टर से अपनी डिलीवरी के कागज मांगे। डॉक्टर ने उसको कागज दे दिए। डॉक्टर ने उससे कहा कि उसके बच्चे की मौत हो गई। उसको जो कागजात दिए उसमें उसका नाम उषा पत्नी नवीन कुमार निवासी पटेल नगर, दिल्ली लिखा हुआ था। मोना शर्मा ने डॉक्टर के साथ मिलकर उसके बच्चे को दिल्ली की उषा को दे दिया था।
वर्जन-
सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा ने बताया कि निजी अस्पताल ने प्रिया के कागज तैयार क्यों नहीं किए। फाइल भी उषा के नाम से बनाई गई। ऐसे में निजी अस्पताल पर सवाल उठ रहे हैं। इस मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। आशा वर्कर की भी इस मामले में संलिप्तता की जांच होगी।