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भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता व साक्ष्य अधिनियम एक जुलाई से होंगे लागू : एसपी

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पानीपत। पुलिस अधीक्षक अजीत सिंह शेखावत व अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अर्चना यादव ने रविवार को आर्य कॉलेज के सभागार में एक दिवसीय सेमिनार में पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को तीनों नए कानूनों के बारे में जानकारी दी।
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पुलिस अधीक्षक अजीत सिंह शेखावत ने कहा कि तीन नए कानून भारतीय न्याय सहिता 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा सहिता 2023 व साक्ष्य अधिनियम एक जुलाई 2024 से लागू हो रहे हैं। यह भारतीय दंड सहिता (आईपीसी), दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) व भारतीय साक्ष्य अधिनियम का स्थान लेंगे। पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए नए कानूनों की जानकारी अनिवार्य है। सभी पुलिसकर्मी इनका गहनता से अध्ययन करें। नए कानूनों में दिए गए प्रावधानों में प्रत्येक कार्रवाई के लिए निश्चित समय सीमा निर्धारित की गई है। नए कानून के अनुसार पुलिस को शिकायत मिलने के तीन दिन के अंदर एफआईआर दर्ज करनी होगी। जिन केसों में तीन से सात साल का प्रावधान है उन केसों में प्रारंभिक जांच के बाद एफआईआर दर्ज करनी होगी। एफआईआर दर्ज करने के बाद पीड़ित को मुकदमे की प्रगति बारे में एसएमएस या अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स माध्यमों द्वारा 90 दिनों के अंदर अंदर जानकारी प्रदान की जाएगी।




अतिरिक्त जिला एव सत्र न्यायाधीश अर्चना यादव ने कहा कि किसी भी अभियोग को अंकित करते समय कानून की पूरी तरह से जानकारी ग्रहण करें और अभियोग से संबंधित पूरे साक्ष्यों को एकत्रित किया जाए। ताकि साक्ष्य के अभाव में गुनाह करने वाला व्यक्ति किसी भी सूरत में सजा से न बच पाए। सीजेएम संदीप चौहान ने इस दौरान पुलिसकर्मियों को तीनों नए कानूनों के बारे में जानकारी देते हुए साक्ष्य अधिनियम की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा की नए कानून के तहत जांच की गुणवत्ता में सुधार करते हुए जघन्य अपराधों में एफएसएल टीम द्वारा क्राइम सीन निरीक्षण करना अनिवार्य किया गया है। तलाशी के दौरान बरामदगी की रिकार्डिंग करनी होगी।
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जिला न्यायवादी राजेश चौधरी ने सेमिनार में भारतीय न्याय संहिता 2023 की धाराओं के बारे में की जानकारी दी। नए कानून बीएनएस के बारे जानकारी देते हुए बताया कि आईपीसी में हत्या का अभियोग 302 धारा के तहत दर्ज किया जाता है इसको अब बीएनएस में 103 धारा के तहत दर्ज किया जाएगा। दुष्कर्म को 376 धारा में दर्ज किया जाता है बीएनएस में 64 धारा के तहत दर्ज किया जाएगा। इसी प्रकार अन्य धारा के नंबरों में बदलाव किया गया। भारतीय दंड सहिता में आईपीसी में 511 धाराएं थी लेकिन भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) में 358 धाराएं रह गई है। इस मौके पर उप पुलिस अधीक्षक सतीश कुमार गौतम, उप पुलिस अधीक्षक नरेंद्र सिंह, उप पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार, उप पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार, एफएसएल टीम इंचार्ज डॉ. नीलम आर्य उपस्थित रहीं।
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