बापौली। मानसून से पहले सिंचाई विभाग द्वारा मिर्जापुर गांव में यमुना किनारे बाढ़ से बचाव के लिए इस बार पत्थर की बजाय मिट्टी के कट्टे भरवाए जा रहे हैं। इनको देख ग्रामीणों को बाढ़ का डर सताने लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि इससे उनकी जान को जोखिम में डालने का काम किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की जान की सिंचाई विभाग को कोई परवाह नहीं है। इसलिए यमुना किनारे मिट्टी के कट्टे भर कर लगाए जा रहे हैं जबकि बाढ़ के लिए सरकार ने पत्थरों का टेंडर दिया था। अभी तक यहां पर पत्थर तो नहीं पहुंचे लेकिन विभाग ने रेत के कट्टे भराने का काम जरूर शुरू कर दिया है। इससे ग्रामीणों में सरकार के प्रति रोष बना हुआ है। मिर्जापुर गांव के पास पत्थर की ठोकर लगाने और बाढ़ बचाव के उचित प्रबंध न किए जाने से ग्रामीणों में रोष है। ग्रामीणों ने सरकार और सिंचाई विभाग के खिलाफ प्रदर्शन कर नारेबाजी की है। आक्रोशित ग्रामीण नरेश, रोशन, कृष्ण, श्याम लाल, सलीम, अशोक, जगदीश, अमित, पालेराम, रमेश, सुरेश आदि ग्रामीणों ने बताया कि सिंचाई विभाग ने पिछले दो वर्षो से उनके गांवों में ठोकरे लगाना तो दूर बल्कि पत्थर तक नहीं आया है। इस बार सिंचाई विभाग ने जिस ठेकेदार को यमुना पर ठोकर लगाने का काम दिया है उसने पांच डंपर पत्थर डाल दिए हैं ताकि ग्रामीणों को दिखा सके कि सिंचाई विभाग ग्रामीणों को बाढ़ से बचाने के लिए काम कर रहा है।
ग्रामीणों को कहना है कि अगर पिछले वर्ष तामशाबाद गांव के पास से यमुना बांध न टूटता तो उनके गांव के पास यमुना बांध टूटने से उनका गांव यमुना नदी की चपेट में आ सकता था लेकिन इसके बाद भी प्रशासन का इस और कोई ध्यान नही है। पूर्व सरपंच पालेराम ने कहा कि ग्रामीण मिल कर सिंचाई विभाग के उच्चधिकारियों से लेकर मुख्यमंत्री तक अपनी गुहार लगा चुके हैं, लेकिन अभी तक बाढ़ नियंत्रण को लेकर विभाग की ओर से ठोस कदम नहीं उठाया गया है। गांवों में ठोकर लगाने के लिए पूरा पत्थर भी नहीं पहुंचा है। यमुना बांध टूटा तो मिर्जापुर गांव सबसे पहले प्रभावित होगा। साथ ही गोयला खुर्द, गोयला खेड़ा, गोयला कलां व भल्लौर गांव को भी इसका भारी नुकसान होगा।
सरपंच अनिल गोस्वामी ने बताया कि उन्होंने ग्राम पंचायत का प्रस्ताव पास कर अपना मांग पर सिंचाई विभाग के उच्चाधिकारियों सहित मुख्यमंत्री को भी दिया है। अभी तक कोई समाधान नही हुआ है।
सिंचाई विभाग के एसडीओ सर्वजीत सिंह का कहना है कि पौने दो करोड़ के करीब में यमुना पर ठोकर लगाने का ठेका हुआ है। यमुना पर पत्थर आना शुरू हो गया । ठेकेदार को अभी पत्थर नहीं मिल रहा। जिस कारण से मिर्जापुर में यमुना पर ठोकर लगाने का काम रुका हुआ है। वहां पर मिट्टी के कट्टे भरने का काम शुरू कर दिया है ताकि समय रहते ग्रामीणों का बचाव किया जा सके । इन ठोकरों पर पत्थर गिराने का कार्य चालू किया जाएगा।