पानीपत। यमुना को प्रदूषण से बचाने के लिए प्रशासन सख्त हो गया है। डीसी ने कहा कि अब अगर ड्रेन में केमिकलयुक्त पानी छोड़ा गया तो फैक्टरी मालिक पर केस दर्ज होगा। उसकी गिरफ्तारी भी सुनिश्चित की जाएगी। इस संबंध में उपायुक्त डॉ. वीरेंद्र दहिया ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी को कड़े निर्देश दिए हैं। उन्होंने उद्यमियों पर कार्रवाई की रिपोर्ट भी मांगी है। अब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड बापौली, सनौली व शिमला मोलाना गांव के क्षेत्र में अपनी गश्त बढ़ाएगा।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि बापौली, बहरामपुर गांव, शिमला मोलाना गांव निंबरी के पास ड्रेन में केमिकलयुक्त पानी टैंकर से छोड़ा जाता है। कई फैक्ट्रियों में ईटीपी नहीं है। इसलिए रात के अंधेरे में यमुना को प्रदूषित किया जाता है। बापौली क्षेत्र में ड्रेन का पानी नीला व काला हो चुका है। यमुना प्रदूषित हो रही है। इसमें अमोनिया की मात्रा बहुत अधिक बढ़ रही है। इसलिए दिल्ली के लोगों में बीमारियां फैलने का खतरा भी बढ़ रहा है। दिल्ली सरकार यमुना को प्रदूषित करने के लिए सोनीपत, पानीपत व यमुनानगर को दोषी ठहरा चुकी है। अब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी भूपेंद्र चहल ने उद्यमियों की शिकायत डीसी को दी है।