पानीपत। तीन साल पहले एक लाख लोगों के स्वास्थ्य की जांच के लिए बना 35 करोड़ का समालखा अस्पताल महज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनकर रह गया है। इस 100 बेड के अस्पताल को सरकार आज तक डॉक्टर नहीं दे पाई। अस्पताल महज तीन डॉक्टरों और 10 स्टाफ नर्सों के भरोसे है। स्टाफ की कमी के कारण रात में डॉक्टरों की इमरजेंसी ड्यूटी बंद करनी पड़ गई। अस्पताल की जिम्मेदारी एक एसएमओ व दो डॉक्टरों के कंधों पर है। हर रोज यहां 200-250 लोग इलाज के लिए आते हैं। डॉक्टर खांसी, जुकाम व बुखार का इलाज करने तक ही सीमित हैं। सड़क हादसों में घायल होकर आने वाले रोगियों को सिविल अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। अस्पताल में एक्स-रे व अल्ट्रासाउंड तक की सुविधा नहीं है। समालखा खंड के एक लाख लोग पूरी तरह निजी अस्पतालों और सिविल अस्पताल पर निर्भर हैं।
एक भी विशेषज्ञ नहीं-
समालखा के 100 बेड के अस्पताल में एक भी विशेषज्ञ नहीं है। यहां बाल रोग विशेषज्ञ, सर्जन, हड्डी रोग विशेषज्ञ, मनोरोग विशेषज्ञ, माक्रोबायोलॉजिस्ट, ईएनटी, रेडियोलॉजिस्ट व एक भी नेत्र रोग विशेषज्ञ नहीं है। महज तीन एमबीबीएस डॉक्टरों के सहारे ही अस्पताल चल रहा है।
एक्स-रे मशीन लगाई, पर लाइसेंस नहीं
समालखा अस्पताल में कुछ समय पर एक पुरानी एक्स रे मशीन लगाई गई थी। एक्स रे के लिए लाइसेंस अप्लाई किया गया था। रेडियोलोजिस्ट की तीन दिन समालखा अस्पताल में ड्यूटी करने की बात भी कही गई थी, लेकिन अब तक अस्पताल को एक्स रे का लाइसेंस ही नहीं मिला।
शवगृह तैयार, पोस्टमार्टम शुरू नहीं
समालखा अस्पताल में शवगृह तैयार हो गया है। समालखा खंड के मृतकों का पोस्टमार्टम अब समालखा अस्पताल में ही होना है। सिविल अस्पताल के फोरेंसिक एक्सपर्ट डॉ. नारायण डबास को वहां का इंचार्ज बनाया गया है, लेकिन संसाधन पूरे नहीं हैं। इसलिए वहां पोस्टमार्टम अब तक शुरू नहीं किए गए।
करोड़ों की लागत से लगा ऑक्सीजन टैंक शुरू नहीं
अस्पताल में करीब आठ करोड़ 13 लाख की लागत से छह हजार लीटर का ऑक्सीजन टैंक अभी शुरू नहीं हुआ है। अगर कोरोना का खतरा दोबारा गंभीर हुआ तो स्वास्थ्य विभाग को ऑक्सीजन बेड सिलिंडर पर ही शुरू करने पड़ेंगे।
डॉक्टरों की कमी पूरी करने का प्रयास
डॉक्टरों की कमी पूरी करने का प्रयास है। सरकार समय-समय पर डॉक्टरों की भर्ती के लिए आवेदन भी मांगती है। अब एनएचएम के माध्यम से छह डॉक्टर भर्ती किए जा रहे हैं। धीरे-धीरे डॉक्टरों की कमी पूरी की जाएगी।
- डॉ. जयंत आहूजा, सिविल सर्जन