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Panipat News: हे राम! बड़े संकट, बिछ गई धान, मंडी में भी नहीं खरीदार

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पानीपत। गिरते पारे के बीच सोमवार को औद्योगिक नगरी के मौसम का मिजाज एक बार फिर बदला। इससे किसानों की धुकधुकी बढ़ गई। तेज हवाओं के साथ बारिश में धान की फसल बिछ गई। देर शाम तक रुक-रुक कर बारिश होती रही। इस दौरान पांच मिमी. से अधिक बारिश दर्ज की गई। एक्सपोर्टरों के हड़ताल पर जाने के बाद मंडियों में भी धान की खरीद नहीं हो पाई। उपायुक्त डॉ. वीरेंद्र दहिया के पानीपत मंडी का निरीक्षण करने और अधिकारियों की बैठक लेकर खरीद शुरू करने के आदेश भी काम नहीं आए। ऐसे में सौ किसान अपनी धान से भरी ट्राली मंडी से वापस ले गए। जिले की मंडियों में करीब एक लाख क्विंटल धान पड़ा है। किसान एक बार फसल तो दूसरी बार ढेरियों की तरफ देखते हैं। तिरपाल से ढककर धान को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। इन सबके बीच कई जगह धान भीग गया।
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जिले में सोमवार सुबह एक साथ बारिश शुरू हो गई। कुछ देर बाद मौसम कुछ साफ हो गया। सुबह दस बजे फिर से बूंदाबांदी शुरू हो गई। जिले में तीन से चार एमएम बारिश दर्ज की गई। एक्सपोर्टरों के पीछे हटने से मंडियों में धान की खरीद नहीं की गई। उपायुक्त डॉ. वीरेंद्र कुमार दहिया ने सोमवार को बाबरपुर और पानीपत अनाज मंडियों का दौरा कर खरीद कार्यों की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि सभी खरीद एजेंसी धान खरीद और उठान कार्य में तेज करन के आदेश दिए। उन्होंने ने एसडीएम को निर्देश दिए कि वह धान खरीद के कार्य पर कड़ी नजर रखें और नियमित रूप से अनाज मंडियों का दौरा करते रहें। ट्रांसपोर्टर धान उठान में कोई लापरवाही करते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएं। इस मौके पर एसडीएम मनदीप कुमार व डीएफएससी आदित्य कौशिक मौजूद रहे।

पोर्टल के बाद मौसम में फंस गया किसान
किसान रामकुमार ने कहा कि पहले पोर्टल पर फसल पंजीकरण में उलझा रहा। अब धान कटाई कर मंडी में पहुंचा तो मौसम और व्यवस्था में फंस गए। मंडी में खरीदार तक नहीं हैं। वे यहां धान डालते हैं तो खेत सूना हो जाता है। मंडी से धान तक चोरी हो जाती है। मंडियों में धान की सुरक्षा को लेकर कोई खास प्रबंध नहीं हैं। आढ़ती एसोसिएशन के जिला प्रधान धर्मवीर मलिक ने बताया कि किसान छह महीने में मंडी में आता है। इस दौरान उनको सुविधा तो दूर फसल खरीदने वाला भी नहीं मिलता। किसान अपनी धान वापस ले जाने को मजबूर हैं।
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सनौली। बरसात का पानी अनाज मंडी बापौली में सीवरेज व्यवस्था ठप होने से मंडी के अंदर ही जमा होने लगा। दोपहर बाद किसान अपने धान को मंडी के फड़ में सुखाने में जुटे दिखे। मंडी सचिव सुंदर सिंह का कहना है कि अनाज मंडी में प्राइवेट मिलर्स हड़ताल पर होने से धान की दो दिनों से खरीद नहीं हो रही है। वहीं बरसात का पानी सीवरेज अचानक भर जाने पर निकासी समस्या हो गई है। इसे जल्द ही ठीक करवाया जाएगा।
इसराना में तेज हवाओं के साथ सोमवार को आई हल्की बारिश से जहां खेतों में किसानों की धान की फसल बिछ गई है वहीं धान की कटाई भी रुक गई है। दूसरी ओर अनाज मंडी में भी हल्की बरसात ने अपना असर दिखा दिया है। मंडी में लगे धान के ढेर से नमी को सुखाने के लिए किसान मजदूरों के साथ धान को फैला और उछाल कर नमी निकालने का प्रयास कर रहे थे। इसी बीच बारिश ने फिर से धान को भिगो कर रख दिया है। यहां पीआर की खरीद नहीं हो सकी। वहीं 1509 की खरीद निर्यातक पहले से बंद कर चुके हैं।

समालखा प्राइवेट मिलर्स की देशव्यापी हड़ताल के चलते समालखा नई अनाज मंडी में भी धान की खरीद प्रभावित रही। प्राइवेट मिलर्स धान नहीं खरीद रहे हैं जिससे मंडी में धान के ढ़ेर लग गए हैं। गत तीन दिनों से धान की खरीद नहीं हो पा रही है। इसके साथ ही मंडी में पड़ी धान का उठान भी नहीं होने से किसानों और स्थानीय प्रशासन की परेशानी बढ़ गई है। वहीं पीआर धान की खरीद सरकारी एजेंसी हैफेड की जा रही है। मंडी सुपरवाइजर संदीप घनघस ने बताया कि अभी तक मंडी में 32 हजार क्विंटल धान की आवक हुई है और 31300 क्विंटल धान की खरीद हो चुकी है।
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