पानीपत। आपकी आंखों में सूखापन है यानी आंसू न आना और लालिमा रहती है। साथ ही गले व नाक में सूखापन है तो यह गंभीर बीमारी स्जोग्रेन सिंड्रोम हो सकता है। यह दूसरी कई लाइलाज बीमारियों की तरह है। इसमें रोगी व्यक्ति का इम्यून सिस्टम अपने ही शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं पर हमला करने लगता है। यह रोग पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में अधिक पाया जाता है। स्जोग्रेन सिंड्रोम के साथ रोगी को दूसरी बीमारी भी घेरने लग जाती हैं। इसमें गठिया, लुपस और सीलियेक डिसऑर्डर भी हो जाता है।
हर साल 23 जुलाई को लोगों को जागरूक करने के लिए विश्व स्जोग्रेन सिंड्रोम दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह 40 साल की उम्र के बाद महिलाओं में अक्सर हो जाता है। स्जोग्रेन सिंड्रोम प्राथमिक और माध्यमिक दो वर्ग में होता है। इसमें अन्य लक्षणों में आंखों में जलन, आंसू बनने की प्रक्रिया में कमी, आंख संक्रमण और आंख के गुंबद के गंभीर घर्षण के कारण हो सकता है। सूखी आंखें भी संक्रमण और पलक (ब्लीफेराइटिस) की सूजन से ग्रस्त हैं। लार ग्रंथियों की सूजन मुंह, दांत क्षय, गुहा, गोंद की बीमारी, मुंह के घावों और सूजन, सूखी खांसी आदि की सूखापन का कारण बनती है। स्जोग्रेन सिंड्रोम से जुड़े अन्य लक्षण संयुक्त दर्द, त्वचा चकत्ते या सूखी त्वचा और थकान है।
श्री कृष्णा आयुष विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र के सहायक प्रोफेसर डॉ. राजा सिंगला ने बताया कि स्जोग्रेन सिंड्रोम के प्रबंधन में आयुर्वेद चिकित्सा एक संभावित गेम चेंजर के रूप में उभरी है। अपने समग्र दृष्टिकोण और सदियों पुराने ज्ञान के साथ आयुर्वेद ने इस दुर्लभ स्थिति से जूझ रहे व्यक्तियों को राहत प्रदान करने और जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने की अपनी क्षमता के लिए ध्यान आकर्षित किया है। ऐसी स्थिति न केवल शारीरिक परेशानी का कारण बनती है, बल्कि प्रभावित लोगों की कार्यक्षमता को भी प्रभावित करती है।
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इलाज के बाद मिला एक तरह से नया जीवन
पानीपत निवासी एक महिला ने बताया कि उसकी आंखों में सूखापन आ गया था। आंखों में आंसू तक नहीं निकलते थे। यह बीमारी करीब छह साल से थी। पिछले एक साल से ज्वाइंट पेन हो रहा था। उसने श्री कृष्णा आयुष विश्वविद्यालय में संपर्क किया। यहां तीन महीने पंचकर्मा कराया गया है। इसके बाद उसको आराम होता चला गया। वह अब पूरी तरह से स्वस्थ है। यूपी के मुजफ्फरनगर निवासी एक महिला ने बताया कि वह स्जाेग्रेन सिंड्रोम से पिछले आठ माह से ग्रस्त थी। जिससे उनको ज्वाइंट में दर्द होने लगा था। सर्दियों में अंगुली नीली पड़ने लगी थी। उसने मेरठ के एक अस्पताल में जांच कराकर दवा ली, लेकिन किसी प्रकार का आराम नहीं मिला। इसके बाद दिल्ली के एक बड़े अस्पताल में इलाज कराया। उसके पति ने सोशल मीडिया पर बीमारी के बारे में पता करते समय श्रीकृष्णा आयुष विश्वविद्यालय में डॉ. राजा सिंगला से संपर्क किया। उसने यहां से इलाज कराया। वह अब पूरी तरह से स्वस्थ है।