पानीपत। स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टर समेत सभी विंगों के कर्मचारियों ने विधानसभा चुनाव से पहले सरकार के खिलाफ आंदोलन का बिगुल बजा दिया है। अब डॉक्टरों, नर्सिंग आफिसर, फार्मासिस्ट व एनएचएम के कर्मचारियों ने सरकार को आंदोलन की चेतावनी दी है। बुधवार को नेशनल हेल्थ मिशन के अंतर्गत कार्यरत कर्मचारियों ने सुबह 10 से 12 बजे तक हड़ताल रखी।
कर्मचारियों ने बुधवार को सिविल सर्जन कार्यालय के बाहर धरना दिया और सरकार के खिलाफ जमकर रोष प्रदर्शन किया। इस दौरान अस्पताल का लगभग सारा काम प्रभावित रहा। एनएचएम की स्टेट बॉडी ने आगामी रणनीति के लिए वीरवार को अपनी बैठक बुलाई है। एनएचएम कर्मचारी संघ ने जिला नागरिक अस्पताल में निरीक्षण के लिए आए विधायक प्रमोद विज को अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन भी सौंपा है। इस रोष प्रदर्शन की अध्यक्षता एनएचएम संघ के जिलाध्यक्ष अमित मलिक ने की।
जिलाध्यक्ष अमित मलिक ने कहा कि एनएचएम कर्मचारी स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ है। एनएचएम के अंतर्गत डॉक्टर, नर्सिंग ऑफिसर, फार्मासिस्ट, लैब टैक्निशयन, सामाजिक कार्यकर्ता, क्लर्क, डाटा एंट्री ऑपरेशन, एंबुलेंस चालक समेत तमाम कर्मचारी कार्यरत हैं। कई कई साल से वह एनएचएम के अंतर्गत कार्यरत हैं। आज तक उनको सातवां पे स्केल नहीं दिया गया है। वह सालों से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष करते आए हैं। कोरोना काल में कई कर्मचारियों ने काम करते हुए अपनी जान तक गवां दी थी। स्वास्थ्य विभाग पूर्ण रूप से एनएचएम कर्मचारियों पर निर्भर है लेकिन उनका शोषण हो रहा है। उनकी मांग है कि उन्हें सातवां पे स्केल दिया जाए। उनको पक्का किया जाए, ईएल , चिकित्सा सुविधा, सेवानिवृति पर ग्रेज्युटी व नौकरी की सुरक्षा जाए। अगर जल्द उनकी मांगों को नहीं माना जाता तो वह आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।
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सभी विंगों के कर्मचारियों ने शुरू किया आंदोलन
डॉक्टर अपनी चार सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार को अल्टीमेटम दे चुके हैं। फार्मासिस्ट 26 जुलाई से सामूहिक अवकाश पर जा सकते हैं। नर्सिंग ऑफिसर की स्टेट बॉडी आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर रही है। अब एनएचएम कर्मचारियों की चेतावनी ने सरकार की परेशानी बढ़ा दी है।