बिजली निगम के अधिकारी अपने चहेते तकनीकी स्टॉफ कर्मचारियों को मुंशी बनाकर रख रहे हैं। इनको वापस फील्ड में लगाने को लेकर सरकार पिछले चार साल में पांच बार अधिकारियों को पत्राचार और रिमाइंडर भेज चुकी है, लेकिन अधिकारी सरकार के आदेशों को भी मानने को तैयार नहीं है। सरकार पिछले पांच साल से अधिकारियों से सिर्फ ये प्रमाण पत्र मांग रही है कि क्या उन्होंने सभी तकनीकी स्टॉफ को फील्ड में लगाया है या नहीं। निगम अधिकारी सरकार को ये प्रमाण पत्र तक देने को तैयार नहीं है। जिस पर मुख्यालय ने इस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को सात दिन में रिपोर्ट भेजने के आदेश दिए हैं।
इसके अलावा उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम मुख्यालय ने निगम अधिकारियों को पत्र भेजकर सख्ती से आदेशों का पालन करने की चेतावनी भी दी है। पत्राचार में लिखा गया है कि आदेशों की अवमानना गंभीर मुद्दा है। बताया जा रहा है कि जिले के सभी बिजली निगम के दफ्तरों में सौ से भी ज्यादा तकनीकी स्टॉफ कार्यालयों में मुंशी क्लर्क का काम कर रहा है। जिससे फील्ड में बिजली के फॉल्ट तक ठीक नहीं हो पा रहे हैं। हालांकि कुछ दिनों पहले बिजली निगम सिटी एक्सईएन ने तो अपने अधीनस्थ सब डिवीजन के एसडीओ को पत्राचार कर तकनीकी स्टॉफ को फील्ड में लगाने के आदेश तो दिए थे लेकिन उनके अभी आदेशों को अधिकारी ठेंगा दिखा रहे हैं।
गौरतलब है कि बिजली निगम में तकनीकी स्टॉफ के कर्मचारियों को उनके चहेते अधिकारी फील्ड के काम से बचाने के लिए उनको अपने पास मुंशी या क्लर्क बनाकर रख लेते हैं। जबकि बिजली निगम में मुंशी नाम की कोई पोस्ट ही नहीं है। जिससे ये तकनीकी स्टॉफ दफ्तरों में आराम फरमा रहा है। इससे फील्ड में तकनीकी स्टॉफ की कमी है। जिससे फॉल्ट ठीक करवाने में निगम के सामने चुनौतियां बनी हुई हैं। इस समाचार को अमर उजाला ने अपने 18 जून के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया था। जिस पर अगले ही दिन बिजली निगम के मुख्यालय ने संज्ञान लेकर 19 जून को बिजली निगम के प्रदेश भर के अधिकारियों को प्रमाण पत्र भेजने आदेश जारी कर दिए हैं। ये आदेश पंचकूला मुख्यालय उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम के अवर सचिव दीपेश्वरी रावत ने जारी किए हैं।