पानीपत। गोहाना सीआईए की टीम ने दीवाना गांव से एक किसान को 13 अगस्त को हिरासत में ले लिया। किसान पर सीआईए कर्मचारियों ने एक मामले में नामजद उसके रिश्तेदार को सीआईए में पेश करने का दबाव बनाया। किसान को प्रताड़ित किया गया। अपने पति की सुरक्षा के लिए किसान की पत्नी हाईकोर्ट पहुंच गई। हाईकोर्ट से वारंट टीम गोहाना सीआईए कार्यालय पहुंची तो सीआईए की टीमें किसान को यहां से निकालकर ले गई। हाईकोर्ट के अधिकारियों के सामने सीआईए के कर्मचारियों को किसान के हिरासत में होने से इंकार कर दिया। इसके बाद आनन फानन में सीआईए ने किसान को छोड़ दिया।
दीवाना गांव निवासी जसमेर सिंह ने बताया कि वह गांव में खेतों में रहता है। यहां उसने थ्री लेयर फार्म लगा रखा है। 13 अगस्त की रात 12 बजे उसके घर पर गोहाना सीआईए के कर्मचारी आए थे। वह उसे उठाकर ले गए। उसको धक्के मारे गए। उसने कॉल कर गांव ही अनाजमंडी के प्रधान दिनेश भुक्कर को बुला लिया। उन्होंने सीआईए के कर्मचारियों को कहा कि वह सुबह जसमेर को लेकर गोहाना सीआईए में आ जाएंगे लेकिन उन्होंने एक नहीं सुनी और वह उसे ले गए। उसको कहा गया कि उसके रिश्तेदार पर केस दर्ज है। वह अपने रिश्तेदार को सीआईए में पेश करें तब वह उसे छोड़ेंगे। उसकी पत्नी ने इस संबंध में हाईकोर्ट का दरवाजा खटाया। हाईकोर्ट की वारंट टीम 14 अगस्त रात को गोहाना सीआईए में पहुंची तो उन्हें भनक लग गई वह उसे वहां से निकालकर मुडलाना पुलिस चौकी में ले गए। वारंट टीम यहां पहुंची तो वह उसे यहां से पीछे वाली दीवार से कूदा कर जींद ले गए। पुलिस कर्मचारियों ने वारंट टीम से कहा कि उन्होंने जसमेर को हिरासत में नहीं लिया। उन्होंने 15 अगस्त को प्रैस कॉन्फ्रेंस की तो उन्होंने उसे छोड़ दिया। अब उनकी मांग है कि गोहाना सीआईए के कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाए। गोहाना सीआईए प्रभारी वीरेंद्र सिंह ने बताया कि गोहाना में लोगों से छह माह पहले नौ करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई थी। आरोपी के बारे में जानने के लिए उसके जीजा को हिरासत में लिया था। पूछताछ के बाद उसे छोड़ दिया गया।