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शरण में आने वाले को आश्रय देते हैं भगवान : आचार्य

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पानीपत। श्री रघुनाथ धाम मंदिर सेक्टर-25 में चल रही श्रीमद्भागवत कथा नें आचार्य चंद्रशेखर त्रिपाठी ने बताया कि भगवान का जन्म हो जाने के उपरांत जब अष्टभुजा रूपी दुर्गा जी ने कंस को बताया कि तेरा काल ब्रज में उत्पन्न हो गया है, तब उसे बड़ा ही भय सताने लगा। वह जितने भी ब्रज में छोटे-छोटे बच्चे थे, उन सबको अपनी बहन पूतना के द्वारा मरवाने लगा। वह पुतना नाम की राक्षसी एक दिन नंद महल में गोपी का स्वरूप रख करके और अपने स्तनों में कालकूट विष लगाकर नंद महल पहुंचती है। जैसे ही भगवान को अकेला पाती है तो अपनी गोद में उठा लेती है और भगवान के मुख में अपने स्तन को दे देती है। जैसे ही भगवान अपने मुख में स्तन को लेते है, स्तनों के द्वारा पूतना के प्राणों को खींच लेते हैं और उस अधम पापनी को भी परम गति प्रदान कर देते है। इससे ज्यादा और कौन दयालु हो सकता है। उसके उपरांत अघासुर, बकासुर का वध किया। आचार्य ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण ने अनेक राक्षसों का वध किया। इसके उपरांत बड़े धूमधाम के साथ श्री गोवर्धन महाराज की पूजा की गई। आचार्य ने कहा कि जो भगवान की शरण में आ जाता है, वह कितना भी बड़ा पापी हो, भगवान उसे अपनी शरण में ले लेते हैं। इस अवसर पर मुख्य रूप से पंडित अखिलेश शुक्ला, शास्त्री जगत नारायण, बृजकिशोर दीक्षित, विजय पांडे, संतोष बाजपेई, गणेश अवस्थी व सुशीला मौजूद रहे।
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