पिछले तीन दिनों से लगातार बढ़ रहे पारे ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। तापमान में एकाएक बढ़ोतरी होने लगी है। गेहूं की फसल को पहले बारिश की आवश्यकता थी, लेकिन धुंध ने इसका काम कर दिया। अब भी गेहूं की फसल को ठंड की जरूरत है, मगर मौसम ऐसे ही रहा तो गेहूं की फसल का दाना कमजोर हो जाएगा। पिछले साल भी मार्च में तेज गर्मी पड़ने लगी थी और गेहूं के उत्पादन में कमी आई थी।
पानीपत जिले में इस बार करीब 85 हजार हेक्टेयर रकबे में गेहूं की बुवाई हुई है। बुवाई के शुरुआती दिनों में गेहूं की फसल के लिए मौसम अच्छा था। जनवरी में किसानों को बारिश की उम्मीद थी, लेकिन नहीं हुई। हालांकि इस बीच पड़ी धुंध ने गेहूं की फसल के लिए अच्छा काम किया, लेकिन फरवरी के पहले ही सप्ताह में तापमान में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। अधिकतम तापमान पिछले एक सप्ताह में छह डिग्री तक बढ़ चुका है। वहीं न्यूनतम तापमान में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार गेहूं की अगैती फसल में इस समय बालियां आने लगी हैं। ऐसे में गेहूं की फसल को 22 डिग्री या इससे कम तापमान चाहिए, लेकिन पानीपत में मंगलवार को अधिकतम तापमान बढ़कर 24 और न्यूनतम तापमान 11 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। फरवरी के मध्य तक अधिकतम तापमान 28 डिग्री और न्यूनतम 14 डिग्री तक पहुंचने की संभावना है। ऐसे में किसानों की चिंता स्वाभाविक है।
किसान बोले- ज्यादा गर्मी से सूखेगा दाना, घटेगी पैदावार
लोहारी गांव के किसान भीम सिंह रोजड़ा, भालसी के किसान ईश्वर सिंह और नौल्था के युवा किसान राकेश जागलान ने कहा कि गेहूं के दाने में दूध पड़ना शुरू हो गया है। अगर धूप अधिक निकली और गर्मी बढ़ी तो यह दूध सूखने लगेगा और दाना परिपक्व नहीं हो पाएगा। इससे पैदावार में कमी आएगी। जनवरी में गेहूं की फसल को बारिश की आवश्यकता थी, लेकिन बारिश नहीं हुई। हालांकि कुछ दिन धुंध रहने से फसल की जरूरत पूरी हुई, लेकिन अब अचानक पारा बढ़ने लगा है, जो गेहूं के लिए ठीक नहीं है।
पिछले साल भी मौसम ने दिया था दगा
पिछले साल भी मार्च में अचानक आई गर्मी के कारण गेहूं की फसल को नुकसान हुआ था। इस दौरान गेहूं की झाड़ कम रही और दाने में भी भार नहीं था। अमूमन पानीपत जिले में किसान एक एकड़ से 16 से 20 क्विंटल गेहूं की उपज करते हैं, लेकिन पिछले साल यह आंकड़ा 14 से 16 क्विंटल प्रति एकड़ तक रह गया था।
मौसम में बदलाव आया है, जो गेहूं की फसल के लिए नुकसानदायक है। इस समय तापमान 22 डिग्री सेल्सियस तक रहना चाहिए, लेकिन तापमान बढ़ा है। अगर तापमान 30 डिग्री तक पहुंच गया तो गेहूं की फसल को भारी नुकसान होगा। इस समय गेहूं की बालियां निकल रही हैं और बालियों में दूध आ रहा है। तापमान बढ़ने के कारण दूध सूख जाएगा और दाना कमजोर हो जाएगा। किसान फसलों को पानी देते रहें।
-डॉ. राजबीर सिंह, वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र, उझा।